US Midterm Elections 2026: अमेरिका के चुनाव में वो 11 भारतीय चेहरे! कौन बनेगा सांसद, गवर्नर और मेयर?

Published : Nov 04, 2026, 10:02 AM IST

US Midterm Elections 2026: अमेरिका के चुनावी मैदान में भारतीय मूल के 13 चेहरे! विवेक रामास्वामी से रो खन्ना तक, कोई गवर्नर तो कोई सांसद और मेयर बनने की दौड़ में है। कौन किसे दे रहा टक्कर? किसकी राह आसान और किसके सामने बड़ी चुनौती? देखिए पूरी कहानी!

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Indian Americans: अमेरिका के चुनाव में किस्मत आजमा रहे भारतवंशी, कौन कहां से मैदान में?

US Midterm Elections 2026: अमेरिका के 2026 मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवार कई अहम पदों के लिए मैदान में हैं। कोई गवर्नर बनने की दौड़ में है, तो कोई अमेरिकी कांग्रेस में अपनी जगह बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली से लेकर ओहायो, एरिजोना और न्यूयॉर्क तक भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों की मौजूदगी दिखाई दे रही है। इनमें अनुभवी सांसद भी हैं और पहली बार बड़े चुनावी मुकाबले में उतरे चेहरे भी। आइए, तस्वीरों के जरिए जानते हैं इन 13 भारतीय मूल के नेताओं और उम्मीदवारों की राजनीतिक कहानी।

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1. विवेक रामास्वामी-ओहायो के गवर्नर पद पर नजर

विवेक रामास्वामी 2026 के अमेरिकी चुनावों में भारतीय मूल के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल हैं। 41 वर्षीय रामास्वामी का जन्म अमेरिका के सिनसिनाटी में हुआ। उनके माता-पिता केरल से अमेरिका आए थे। उन्होंने बायोटेक कंपनी Roivant Sciences की स्थापना की और कारोबार के बाद राजनीति में कदम रखा। 2024 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी भी पेश की थी। अब वह ओहायो के गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला डेमोक्रेट एमी एक्टन से है, जो राज्य के स्वास्थ्य विभाग की पूर्व प्रमुख रह चुकी हैं। इस मुकाबले पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर है।

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2. रो खन्ना-सिलिकॉन वैली में फिर चुनावी परीक्षा

रो खन्ना कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल जिले से डेमोक्रेट सांसद हैं। इस जिले में सिलिकॉन वैली का बड़ा हिस्सा आता है। फिलाडेल्फिया में जन्मे खन्ना के माता-पिता पंजाब से अमेरिका पहुंचे थे। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में प्रगतिशील विचारों के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं और कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। 2026 में वह एक बार फिर अपनी सीट बचाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। इस बार उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार रितेश टंडन से है। यानी इस सीट पर दो भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार आमने-सामने हैं। नतीजा चाहे जो हो, इस मुकाबले में भारतीय मूल के किसी एक नेता का प्रतिनिधित्व तय है।

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3. रितेश टंडन-रो खन्ना को दे रहे चुनौती

रितेश टंडन कैलिफोर्निया के 17वें जिले से रिपब्लिकन उम्मीदवार के तौर पर रो खन्ना को चुनौती दे रहे हैं। पेशे से इंजीनियर और Kricel Corporation के CEO टंडन करीब 28 साल की उम्र में भारत से अमेरिका पहुंचे थे। उनकी उम्मीदवारी ने सिलिकॉन वैली की इस सीट को खास बना दिया है, क्योंकि यहां दोनों प्रमुख उम्मीदवार भारतीय मूल के हैं। हालांकि, इस मुकाबले में खन्ना का राजनीतिक अनुभव और लगातार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड उनके पक्ष में माना जाता है। टंडन के सामने अपनी पहचान और समर्थन का दायरा बढ़ाने की चुनौती है। यह मुकाबला अमेरिकी राजनीति में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की बढ़ती भागीदारी की भी एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है।

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4. प्रमिला जयपाल-चेन्नई से अमेरिकी कांग्रेस तक का सफर

प्रमिला जयपाल का जन्म चेन्नई में हुआ था। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला हैं। वह वाशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल जिले का प्रतिनिधित्व करती हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील खेमे की प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं। 2026 में वह फिर से अपनी सीट के लिए चुनाव लड़ रही हैं। राजनीति में आने से पहले उनका सफर प्रवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और जनहित के मुद्दों पर काम करने वाली आवाज के रूप में आगे बढ़ा। उनकी किताब ‘Use the Power You Have’ में इसी यात्रा का जिक्र है। अमेरिकी राजनीति में प्रवासी समुदाय की भागीदारी समझने के लिहाज से जयपाल की कहानी अहम है।

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5. अमी बेरा-कांग्रेस में सबसे अनुभवी भारतीय-अमेरिकी डॉक्टर

अमी बेरा पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारतीय-अमेरिकी समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल जिले से डेमोक्रेट सांसद हैं। 2012 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद से वह लगातार कांग्रेस में अपनी जगह बनाए हुए हैं। 2026 में उनका लक्ष्य एक बार फिर सीट जीतकर प्रतिनिधि सभा में लौटना है। भारतीय मूल के सांसदों में उन्हें सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेताओं में गिना जाता है। राजनीति में आने से पहले चिकित्सा क्षेत्र में काम करने का अनुभव उनकी सार्वजनिक पहचान का अहम हिस्सा है। इस चुनाव में उनकी दावेदारी भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

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6. सुहास सुब्रमण्यम-वर्जीनिया से दोबारा चुनावी मैदान में

सुहास सुब्रमण्यम 2024 में वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल जिले से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे। इससे पहले वह वर्जीनिया हाउस ऑफ डेलीगेट्स और राज्य की सीनेट में भी काम कर चुके हैं। 2026 में वह पहली बार कांग्रेस में अपने कार्यकाल के बाद मतदाताओं के सामने दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं। उनका क्षेत्र उत्तरी वर्जीनिया में है और वॉशिंगटन डीसी के आसपास के इलाकों को शामिल करता है। सुब्रमण्यम की राजनीतिक यात्रा राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचने की कहानी है। उनके लिए यह चुनाव कांग्रेस में अपनी जगह मजबूत करने का मौका है। उनकी जीत या हार का आकलन आधिकारिक नतीजों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

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7. अमीश शाह-पूर्व NFL खिलाड़ी से मुकाबला

अमीश शाह पेशे से इमरजेंसी फिजिशियन हैं और एरिजोना की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वह एरिजोना के पहले कांग्रेसनल जिले से डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं। 2026 में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार जे फीली से है, जो पूर्व NFL किकर रह चुके हैं। इस मुकाबले की एक दिलचस्प बात दोनों का पुराना परिचय है। 2008 और 2009 में जब फीली न्यूयॉर्क जेट्स टीम के लिए खेलते थे, तब शाह उसी टीम से जुड़े चिकित्सक के तौर पर काम कर रहे थे। गंभीर चोट की स्थिति में खिलाड़ियों को चिकित्सा सहायता देना उनकी जिम्मेदारी थी। अब 15 साल से अधिक समय बाद दोनों एक ही चुनावी सीट के लिए आमने-सामने हैं।

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8. पिया डंडिया-स्कूल की कक्षा से अमेरिकी कांग्रेस की दौड़ तक

पिया डंडिया फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल जिले से डेमोक्रेट उम्मीदवार हैं। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षिका और स्कूल प्रिंसिपल के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्हें व्हाइट हाउस फेलो के तौर पर भी अनुभव मिला है। 2026 के चुनाव में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर से है। डंडिया उन भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों में शामिल हैं, जो इस बार प्रतिनिधि सभा में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह जीतती हैं, तो अमेरिकी कांग्रेस में भारतीय मूल की महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। उनकी उम्मीदवारी यह भी दिखाती है कि शिक्षा और प्रशासन से जुड़े अनुभव वाले लोग अमेरिकी राजनीति में किस तरह आगे आ रहे हैं।

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9. सरिता कोमाटीरेड्डी-न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल सीट पर नजर

सरिता कोमाटीरेड्डी न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। उनका मुकाबला मौजूदा डेमोक्रेटिक अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स से है। कोमाटीरेड्डी पहले संघीय अभियोजक के तौर पर काम कर चुकी हैं। इसके अलावा वह ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) में चीफ ऑफ स्टाफ की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। कानून और जांच से जुड़े उनके अनुभव को उनकी उम्मीदवारी का प्रमुख आधार माना जा रहा है। न्यूयॉर्क का अटॉर्नी जनरल पद राज्य के महत्वपूर्ण कानूनी और प्रशासनिक पदों में से एक है। ऐसे में उनका मुकाबला सिर्फ भारतीय मूल के उम्मीदवार के तौर पर ही नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति के लिहाज से भी अहम है।

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10. अरुणा मिलर-हैदराबाद से मैरीलैंड की राजनीति तक

अरुणा मिलर का जन्म हैदराबाद में हुआ था। वह मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं और 2026 में एक और कार्यकाल हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। 2022 में जीत के बाद वह राज्य स्तर पर निर्वाचित पद तक पहुंचने वाली पहली प्रवासी महिला बनी थीं। अमेरिकी राजनीति में उनका सफर भारतीय मूल की महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उदाहरण है। लेफ्टिनेंट गवर्नर के तौर पर वह राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक कामकाज में अहम भूमिका निभाती हैं। उनकी दोबारा चुनावी दावेदारी पर इसलिए भी नजर है, क्योंकि यह मुकाबला मैरीलैंड में भारतीय-अमेरिकी प्रतिनिधित्व की निरंतरता से जुड़ा है। उनके चुनावी परिणाम की पुष्टि आधिकारिक नतीजों से की जानी चाहिए।

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11. नित्या रमन-लॉस एंजिलिस की मेयर बनने की कोशिश

नित्या रमन लॉस एंजिलिस की सिटी काउंसिल सदस्य हैं और 2026 में शहर के मेयर पद के लिए मौजूदा मेयर करेन बास को चुनौती दे रही हैं। भारत में जन्मीं रमन ने 2020 में सिटी काउंसिल का चुनाव जीतकर स्थानीय राजनीति में अपनी जगह बनाई थी। आवास संकट और बेघर लोगों से जुड़े मुद्दे उनके राजनीतिक कामकाज के प्रमुख विषय रहे हैं। लॉस एंजिलिस का मेयर चुनाव आधिकारिक तौर पर गैर-दलीय होता है, यानी उम्मीदवार किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ते। अगर रमन जीतती हैं, तो वह दक्षिण एशियाई मूल की पहली ऐसी नेता होंगी, जो अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े शहर की मेयर बनेंगी। यह मुकाबला स्थानीय राजनीति में उनकी लोकप्रियता की भी परीक्षा है।

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भारतीय-अमेरिकी राजनीति के लिए क्यों अहम हैं ये चुनाव?

2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनाव भारतीय मूल के समुदाय के राजनीतिक प्रभाव को समझने का एक महत्वपूर्ण मौका हैं। इन उम्मीदवारों की दावेदारी सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा तक सीमित नहीं है। यह अमेरिकी समाज में प्रवासी समुदाय की बदलती भूमिका और प्रतिनिधित्व की कहानी भी है। इन चुनावों में यह भी दिखता है कि भारतीय मूल के नेता डेमोक्रेट और रिपब्लिकन-दोनों दलों में सक्रिय हैं। कांग्रेस, गवर्नर पद, अटॉर्नी जनरल और मेयर जैसे अलग-अलग पदों पर उनकी मौजूदगी अमेरिकी राजनीति में इस समुदाय की बढ़ती भागीदारी को सामने लाती है।

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