West Bengal Election 2026: 'सिंघम' IPS विवाद के बाद ADM हटे, BDO ट्रांसफर-बड़े उलटफेर से बवाल

Published : Apr 29, 2026, 07:38 AM IST

बंगाल चुनाव 2026 में ‘सिंघम’ IPS विवाद ने बढ़ाया तनाव-फालता BDO ट्रांसफर, TMC विरोध, रूट मार्च और केंद्रीय बलों की सख्ती के बीच वोटिंग से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, क्या छिपा है इस अचानक फैसले के पीछे?

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West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे और अंतिम चरण से ठीक पहले दक्षिण 24 परगना जिले के फालता विधानसभा क्षेत्र में हुए एक प्रशासनिक फैसले ने सियासी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है। चुनाव आयोग द्वारा जॉइंट ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) सौरव हाजरा का अचानक तबादला कर उन्हें पुरुलिया भेजना कई सवाल खड़े कर रहा है। आधिकारिक तौर पर इसे “नियमित तबादला” बताया गया, लेकिन समय और परिस्थितियों ने इसे बेहद संवेदनशील बना दिया है।

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अचानक तबादला या रणनीतिक कदम?

चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना के फलता में तैनात जॉइंट BDO सौरव हाजरा का अचानक तबादला कर उन्हें पुरुलिया भेज दिया। उनकी जगह रम्या भट्टाचार्य को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आधिकारिक तौर पर इसे “रूटीन ट्रांसफर” बताया गया, लेकिन चुनाव से कुछ घंटे पहले लिया गया यह फैसला राजनीतिक हलकों में संदेह पैदा कर रहा है। साथ ही, दो ADM अधिकारियों को भी चुनावी ड्यूटी से हटा दिया गया, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया।

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‘सिंघम’ एंट्री और बढ़ता टकराव

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा हैं, जिन्हें उनकी सख्त कार्यशैली के कारण ‘सिंघम’ कहा जाता है। चुनाव आयोग द्वारा विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त शर्मा ने फालता में पहुंचकर आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने केंद्रीय बलों के साथ देर रात छापेमारी की और मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोपों पर कड़ी चेतावनी जारी की। लेकिन उनकी इस कार्रवाई का सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने विरोध किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके दौरे के खिलाफ प्रदर्शन किया और उन पर “सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई” करने का आरोप लगाया। यह टकराव धीरे-धीरे सियासी विवाद में बदल गया।

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रूट मार्च, विरोध और चरम पर पहुंचा तनाव

स्थिति मंगलवार को और बिगड़ गई जब शर्मा ने संवेदनशील इलाकों में रूट मार्च किया और खुफिया जानकारी के आधार पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सैकड़ों TMC समर्थक सड़कों पर उतर आए और “वापस जाओ” जैसे नारे लगाए। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की भारी मौजूदगी, बख्तरबंद वाहन और संभावित उपद्रवियों की सूची के साथ पुलिस की सख्ती ने माहौल को और भी तनावपूर्ण बना दिया। फालता, जो डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, पहले से ही एक संवेदनशील सीट मानी जाती रही है।

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संवेदनशील सीट पर कड़ी निगरानी

फलता सीट, जो डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले इलाकों में गिनी जाती है, पहले से ही संवेदनशील मानी जाती रही है। इसी कारण यहां भारी संख्या में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। बख्तरबंद वाहन, हथियारबंद जवान और संभावित उपद्रवियों की सूची के साथ सघन तलाशी अभियान चलाया गया।

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सवालों के घेरे में चुनावी पारदर्शिता

मतदान से कुछ घंटे पहले हुए इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल ने चुनाव की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर चुनाव आयोग सख्ती और नियंत्रण का संदेश देना चाहता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

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