Published : Sep 07, 2024, 10:25 AM ISTUpdated : Sep 07, 2024, 01:19 PM IST
Ganesh Chaturthi 2024: इस बार 7 सितंबर, शनिवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। भगवान श्रीगणेश से जुड़ी ऐसी अनेक बातें हैं, जिनके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। जानें कुछ ऐसी ही अनसुनी और रोचक बातें।
Interesting Facts related to Shri Ganesh: धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्रीगणेश का जन्म हुआ था। हर साल इस तिथि पर गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये उत्सव 7 सितंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। भगवान श्रीगणेश का जन्म कैसे हुआ और उनका मस्तक के स्थान पर किस प्रकार हाथी का मस्तक जोड़ा गया आदि बहुत सी बातें आमजन जानते हैं, लेकिन श्रीगणेश के बारे में कुछ बातें ऐसी भी हैं जो बहुत से लोग नहीं जानते हैं। गणेशोत्सव के शुभ अवसर पर हम आपको भगवान श्रीगणेश की कुछ ऐसी ही अनजानी व रोचक बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार हैं…
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किसने दिया था श्रीगणेश को श्राप?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार देवी तुलसी गंगा तट से गुजर रही थी, वहां श्रीगणेश तपस्या कर रहे थे। श्रीगणेश को देखकर तुलसी का मन उनकी ओर आकर्षित हो गया। उन्होंने श्रीगणेश से कहा कि ‘आप मेरे स्वामी हो जाइए।’ तब श्रीगणेश ने कहा कि ‘मैं इस समय तपस्या कर रहा हूं, आप मेरी साधना में विघ्न न डालिए।’ श्रीगणेश की बात सुनकर तुलसी ने श्रीगणेश को विवाह करने का श्राप दे दिया और श्रीगणेश ने तुलसी को वृक्ष बनने का।
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कैसा होगा श्रीगणेश का रुप-रंग?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुण्यक नाम व्रत किया था, इसी व्रत के फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण पुत्र रूप में माता पार्वती को प्राप्त हुए। शिवमहापुराण के अनुसार भगवान श्रीगणेश के शरीर का रंग लाल और हरा है। इनका विवाह प्रजापति विश्वरूप की पुत्रियों सिद्धि और बुद्धि से हुआ है। श्रीगणेश के दो पुत्र हैं इनके नाम क्षेत्र तथा लाभ हैं।
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कैसे कटा श्रीगणेश का मस्तक? ये कथा ये भी
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जब सभी देवता श्रीगणेश को आशीर्वाद दे रहे थे तब वहां शनिदेव भी आए हुए थे। जैसे ही शनिदेव ने श्रीगणेश को को देखा तो उसका सिर धड़ से अलग हो गया। भगवान विष्णु एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर लाए और श्रीगणेश के धड़ से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।
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कैसे टूटा श्रीगणेश का दांत?
ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एक बार परशुराम भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत गए तो वहां श्रीगणेश ने परशुरामजी को उनके पास जाने को रोक दिया। क्रोधित होकर परशुरामजी ने फरसे से श्रीगणेश पर वार किया। वो फरसा महादेव ने ही परशुराम को दिया था। श्रीगणेश ने उस फरसे का वार अपने दांत पर झेल लिया, जिसके कारण उनका एक दांत टूट गया। तभी से उन्हें एकदंत भी कहते हैं।
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किस शर्त पर लिखी श्रीगणेश ने महाभारत?
जब महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखने के लिए श्रीगणेश को आमंत्रित किया तो उन्होंने शर्त रखी कि ‘यदि लिखते समय मेरी लेखनी क्षणभर के लिए भी न रूके तो मैं इस ग्रंथ का लेखक बन सकता हूं।’ महर्षि वेदव्यास जी श्रीगणेश की ये शर्त मान ली और कहा कि ‘मैं जो भी बोलूं आप उसे बिना समझे मत लिखना।’ तब वेदव्यास जी बीच-बीच में कुछ ऐसे श्लोक बोलते कि उन्हें समझने में श्रीगणेश को थोड़ा समय लगता। इस बीच महर्षि वेदव्यास अन्य श्लोकों की रचना कर लेते थे।
Disclaimer इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।
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