Hindu Tradition: शव को जलाते समय क्यों और कैसे की जाती है कपाल क्रिया?

Published : Nov 28, 2024, 11:43 AM IST
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सार

Kapal Kriya Kya Hoti Hai: हिंदू धर्म में दाह संस्कार से जुड़े कईं नियम धर्म ग्रंथों में बताए गए हैं। कपाल क्रिया भी इनमें से एक है। कपाल क्रिया कैसे की जाती है और क्यों की जाती है, इसके बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। 

Hindu Funeral Kapal Kriya: हिंदू धर्म के अंतर्गत जब भी किसी की मृत्यु होती है, तो अंतिम संस्कार के दौरान अनेक नियमों का पालन किया जाता है। शव को घर ले जाकर श्मशान में उसका दाह संस्कार किया जाता है यानी उसे जला दिया जाता है। शव को जलाने के बाद भी कईं परंपराएं निभाई जाती है, कपाल क्रिया भी इनमें से एक है। कपाल क्रिया कैसे की जाती है और क्यो करते हैं। इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आगे जानिए कपाल क्रिया के बारे में क्या लिखा है धर्म ग्रंथों में…

क्या होती है कपाल क्रिया?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. नलिन शर्मा के अनुसार, जब मृतक का अग्नि संस्कार किया जाता है तो शव के जल जाने के बाद बांस की लकड़ी से उसके मस्तक पर वार किया जाता है, जिससे खोपड़ी के टुकड़े हो जाएं। ये काम वही करता है, जो शव को अग्नि देता है जैसे पुत्र या भाई आदि। इसे ही कपाल क्रिया कहते हैं। गरुड़ पुराण में भी इसके बारे में लिखा है-
अर्द्धे दग्धेथवा पूर्ण स्फोटयेत् तस्य मस्तकम्।
गृहस्थानां तु काष्ठेन यतीनां श्रीफलेन।

अर्थ- शव के आधे या पूरे जल जाने के बाद मस्तक का भेदन करना चाहिए। गृहस्थ का बांस की लकड़ी से और यतियों (साधुओं) की श्रीफल से कपाल क्रिया करनी चाहिए।

कपाल क्रिया के बाद बाद क्या करें?

कपाल क्रिया करने के बाद मृतक के परिजनों को जोर-जोर से रोना चाहिए। ऐसा करने से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है। गरुड़ पुराण के अनुसार-
रोदितव्यं ततो गाढं येन तस्य सुखं भवेत्।।
अर्थ- कपालक्रिया के बाद मृतक के परिजनों को जोर से रोना चाहिए। ऐसा करने से मृत प्राणी को सुख मिलता है।

क्यों की जाती है कपाल क्रिया?

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की स्मृति उसके मस्तिष्क में होती है। कपाल क्रिया के दौरान शव को मस्तिष्क को नष्ट कर दिया जाता है ताकि इस जन्म की स्मृति उसके अगले जन्म में बाधक न बनें। कहते हैं कि यदि कपाल क्रिया न की जाए तो मृतक के अगले जन्म में लेने में परेशानी होती है और यदि अगला जन्म होता है तो उसे पुरानी स्मृतियां बनी रहती है।


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इस आर्टिकल में जो भी जानकारी दी गई है, वो ज्योतिषियों, पंचांग, धर्म ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित हैं। इन जानकारियों को आप तक पहुंचाने का हम सिर्फ एक माध्यम हैं। यूजर्स से निवेदन है कि वो इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

 

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