
लखनऊ/नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बनने जा रहा है। 28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके उद्घाटन के साथ यह परियोजना सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं रहेगी, बल्कि राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत इंजन साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत विकसित यह एयरपोर्ट यूपी की “लैंड-लॉक्ड” आर्थिक क्षमता को खोलने में मदद करेगा। इससे कृषि, एमएसएमई, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और उद्योग सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ेंगे।
पूर्व सीएफओ, एयर इंडिया सैट्स और यूपीडीएफ के चेयरमैन सीए पंकज जायसवाल के अनुसार, यह देश का सबसे बड़ा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट होगा। इसमें सालाना 7 करोड़ यात्रियों की क्षमता और करीब 10 लाख टन कार्गो हैंडलिंग की सुविधा होगी। इससे फल, सब्जियां, डेयरी और फूल जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे। “फार्म-टू-ग्लोबल मार्केट” मॉडल मजबूत होगा और किसानों की आय में 20–30% तक बढ़ोतरी की संभावना है। साथ ही लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और निर्यात बढ़ेगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट व्यापार और पर्यटन को नई दिशा देगा। यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, आगरा, मथुरा, वृंदावन और वाराणसी जैसे धार्मिक शहरों को वैश्विक पर्यटन सर्किट से जोड़ेगा। इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और धार्मिक, मेडिकल व बिजनेस टूरिज्म को गति मिलेगी। जब एयरपोर्ट पूरी क्षमता से चलेगा, तो इसके प्रभाव से यूपी की जीडीपी में 1% से अधिक की वृद्धि संभव है।
यह एयरपोर्ट रोजगार का बड़ा केंद्र बनेगा। शुरुआती 5 वर्षों में एयरपोर्ट ऑपरेशन, सिक्योरिटी, ग्राउंड हैंडलिंग, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी में 20,000 से ज्यादा नौकरियां बनेंगी। एमआरओ, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एविएशन सेवाओं में 30,000 से अधिक रोजगार मिलेंगे। कुल मिलाकर 50,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार और 5 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनेंगे, जो आगे चलकर 40–50 लाख तक पहुंच सकते हैं।
जेवर एयरपोर्ट के कारण नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र तेजी से विकसित होंगे। बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा-वृंदावन तक नए शहरी कॉरिडोर बनेंगे। एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, ऑफिस स्पेस, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर में निवेश बढ़ेगा। इससे रोजगार और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
बेहतर कनेक्टिविटी और कम लॉजिस्टिक्स लागत के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेंगे। निर्यात आधारित उद्योगों को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे उत्पादन और निवेश दोनों बढ़ेंगे। यह एयरपोर्ट यूपी को एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब बनाने में मदद करेगा।
जेवर एयरपोर्ट को भविष्य में एक बड़े मल्टी-मोडल इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर दबाव कम करेगा और एयर ट्रैफिक को संतुलित करेगा। 5 रनवे की योजना के साथ यह देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन सकता है। इसकी लोकेशन इसे एशिया और यूरोप के बीच एक प्रमुख ट्रांजिट हब बना सकती है, जो दुबई, दोहा और अबु धाबी जैसे हब का विकल्प बन सकता है।
यह एयरपोर्ट ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पास स्थित है। साथ ही यमुना एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ा है, जिससे यह क्षेत्र देश का बड़ा लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और ई-कॉमर्स सेंटर तेजी से विकसित होंगे। लॉजिस्टिक्स लागत घटने से एमएसएमई सेक्टर की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को गति मिलेगी।
एयरपोर्ट के आसपास एयरोसिटी, लॉजिस्टिक्स पार्क और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित हो रहे हैं। राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण घरेलू और विदेशी निवेश बढ़ेगा। “चीन+1 स्ट्रेटजी” के तहत यह क्षेत्र वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक विकल्प बनेगा, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में बड़े निवेश की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में हो रही राजनीतिक हलचल, प्रशासनिक फैसले, धार्मिक स्थल अपडेट्स, अपराध और रोजगार समाचार सबसे पहले पाएं। वाराणसी, लखनऊ, नोएडा से लेकर गांव-कस्बों की हर रिपोर्ट के लिए UP News in Hindi सेक्शन देखें — भरोसेमंद और तेज़ अपडेट्स सिर्फ Asianet News Hindi पर।