यूपी में सामूहिक विवाह योजना का बड़ा असर, अल्पसंख्यक समाज में बढ़ा भरोसा

Published : May 15, 2026, 09:37 PM IST
UP Governments Mass Marriage Scheme Benefits Over 52000 Minority Couples Since 2017

सार

यूपी की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब और अल्पसंख्यक परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन रही है। 2017 से अब तक 52,134 अल्पसंख्यक जोड़ों की शादी इस योजना के तहत कराई गई। जानिए कैसे बदल रही है हजारों परिवारों की जिंदगी।

उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों की शादी लंबे समय तक सबसे बड़ी चिंता मानी जाती रही है। कई परिवार सालों तक कर्ज और सामाजिक दबाव के बीच इस जिम्मेदारी को निभाने की कोशिश करते थे। लेकिन अब मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत और सम्मान का जरिया बनती दिखाई दे रही है।

योगी सरकार की इस योजना का असर अब जमीन पर साफ नजर आने लगा है। खासकर अल्पसंख्यक समाज के परिवारों में इस योजना को लेकर भरोसा तेजी से बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में अल्पसंख्यक वर्ग के 52,134 जोड़ों की शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत कराई जा चुकी है। सरकार का दावा है कि यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और समान अवसर का भी मजबूत संदेश दे रही है।

आर्थिक कमजोर परिवारों को मिला बड़ा सहारा

प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करना है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले गरीब परिवारों को शादी के लिए कर्ज लेना पड़ता था या फिर वर्षों तक पैसे जोड़ने पड़ते थे। अब सरकार आर्थिक सहायता के साथ-साथ गृहस्थी का जरूरी सामान भी उपलब्ध करा रही है, जिससे नवविवाहित जोड़ों को नई जिंदगी शुरू करने में मदद मिल रही है। योजना का लाभ बिना जाति और धर्म के भेदभाव के पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।

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अल्पसंख्यक समाज में बढ़ा भरोसा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक अल्पसंख्यक वर्ग के कुल 52,134 जोड़ों का विवाह इस योजना के तहत कराया गया है। वर्षवार आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • 2017-18 : 1,635 विवाह
  • 2018-19 : 4,973 विवाह
  • 2019-20 : 6,040 विवाह
  • 2020-21 : 1,878 विवाह
  • 2021-22 : 5,160 विवाह
  • 2022-23 : 8,096 विवाह
  • 2023-24 : 8,535 विवाह
  • 2024-25 : 9,381 विवाह
  • 2025-26 : 6,436 विवाह

इन आंकड़ों को सरकार अपनी सामाजिक कल्याण नीतियों की सफलता के तौर पर पेश कर रही है।

सामाजिक समरसता का भी बन रही मिसाल

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को केवल सरकारी सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। इन कार्यक्रमों में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के जोड़ों का एक साथ विवाह कराया जाता है, जिससे समाज में भाईचारे और समानता का संदेश जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन सामाजिक दूरी कम करने और कमजोर वर्गों में आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करते हैं।

सम्मान के साथ नई जिंदगी की शुरुआत

योजना के तहत सरकार नवविवाहित जोड़ों को आर्थिक सहायता के अलावा घरेलू उपयोग की जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराती है। इससे गरीब परिवारों को शादी के तुरंत बाद आर्थिक दबाव का सामना कम करना पड़ता है। कई परिवारों ने इसे बेटियों के सम्मानजनक विवाह के लिए बड़ी राहत बताया है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस योजना के प्रति लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

योगी सरकार ने विकास को बताया प्राथमिकता

योगी सरकार लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि प्रदेश में विकास योजनाओं का आधार जाति या धर्म नहीं, बल्कि पात्रता और जरूरत है। सरकार का कहना है कि “सबका साथ, सबका विकास” का मॉडल तभी सफल होगा जब समाज के हर वर्ग को योजनाओं का समान लाभ मिले। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने कहा कि सरकार हर वर्ग के उत्थान और सामाजिक संतुलन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या बदल रही है गरीब परिवारों की तस्वीर?

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां लाखों परिवार आर्थिक तंगी से जूझते हैं, वहां ऐसी योजनाएं सीधे सामाजिक और आर्थिक स्तर पर असर डालती हैं। यदि योजनाओं का पारदर्शी और प्रभावी तरीके से संचालन जारी रहता है, तो इससे गरीब परिवारों की शादी से जुड़ी बड़ी चिंताएं काफी हद तक कम हो सकती हैं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अब सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद बनती जा रही है जो अपनी बेटियों की शादी को लेकर लंबे समय तक असुरक्षा महसूस करते थे।

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