पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के लिए पहेली बने 4 कंगारू, जानिए आखिर क्या है पूरा मामला

Published : Apr 02, 2022, 06:28 PM ISTUpdated : Apr 02, 2022, 06:32 PM IST
पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के लिए पहेली बने 4 कंगारू, जानिए आखिर क्या है पूरा मामला

सार

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के जलपाइगुड़ी (Jalpaiguri) में वन विभाग (Forest Department) को एक बार फिर कंगारू (Kangaroo) मिले हैं। चार में से एक कंगारू की थोड़ी देर बाद मौत हो गई, जबकि बाकि तीन की हालत भी ज्यादा ठीक नहीं है। 

नई दिल्ली। कंगारू सिर्फ और सिर्फ आस्ट्रेलिया में पाया जाता है, किसी और देश में नहीं। हां, यह अलग बात है कि किसी और देश के चिड़ियाघर में यह इक्का-दुक्का देखने को मिल जाएंगे। यह स्तनधारी जीव आस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पशु भी है।  आस्ट्रेलिया भारत से करीब सात हजार किमी दूर है। ये शाकाहारी जीव हैं। वर्ष 1773 में कैप्टन कुक ने इन्हें पहली बार देखा था और तभी से ये आस्ट्रेलिया के आम जनजीवन में आ गए। 

यह सब बातें इसलिए आपको बताई गई, खबर की भूमिका इसलिए तैयार की गई, क्योंकि अब जो हम आगे बताने जा रहे हैं, वह जानकारी आपको हैरान कर देगी। इसे जानने के बाद आप चौंक जाएंगे कि ऐसा कैसे हुआ। कई सवाल भी मन में खड़े हो जाएंगे। तो चलिए अब बिना देर किए आपको पूरा माजरा समझाते हैं। 

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जलपाईगुड़ी के खेत में घूम रहे थे चार कंगारू
दरअसल, आस्ट्रेलिया से करीब सात हजार किमी दूर भारत में पश्चिम बंगाल राज्य में चार कंगारू देखे गए। ये कंगारू पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में किसी के खेत में घूम रहे थे। गांव वालों ने सोचा किसी चिड़ियाघर से भाग कर आए होंगे। वन विभाग को सूचना दी गई। अधिकारी मौके पर आए तो इन स्तनधारी जीवों को देखकर हैरत में पड़ गए। ये किसी से नहीं भागे थे। सरकार भी इन्हें नहीं लाई थी। अभी वे यह सब सोच ही रहे थे कि एक कंगारू की हालत बिगड़ गई और देखते ही देखते जमीन पर गिर पड़ा। जांच में पता चला कि उसकी मौत हो गई है। 

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शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं
अधिकारियों ने सोचा कि जांच-पड़ताल बाद में करेंगे पहले इन्हें अस्पताल ले चलो कुछ दवा-दर्पण किया जाए। खिलाया-पिलाया जाए। यह घटना  शुक्रवार रात की है। हालांकि, बैकुंठपुर वन क्षेत्र के अधिकारी एसके दत्ता के मुताबिक, उन्हें नियमित गश्त के दौरान ये कंगारू बरामद हुए थे। बहरहाल, जैसे भी मिले हों, मगर भारत में इस जगह इस हाल में मिलना, बात कुछ हजम नहीं हुई। दत्ता के अनुसार, कंगारुओं के शरीर पर गंभीर चोट के निशान हैं। यह चोट कैसे लगी, निशान किसने, कब, कहां, क्यों और कैसे दिए? इन सवालों के जवाब के लिए जांच की जा रही है। मगर शुरुआत में यह कुछ-कुछ तस्करी का मामला लग रहा है। 

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मार्च में दो तस्कर गिरफतार हुए थे
इससे पहले, बंगाल पुलिस बीते मार्च में अवैध रूप से कंगारू ले जाने के मामले में हैदराबाद के दो तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी है। वैसे कंगारुओं का अचानक भारत में मिलना, वह भी बंगाल और मिजोरम सीमावर्ती क्षेत्रों में मिलना, पहेली बना हुआ है। बहरहाल, करीब 11 साल पहले भी यानी जून 2011 में भी पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अलीपुर चिड़ियाघर में चेक गणराज्य से दो जोड़े लाल कंगारू लाए गए थे, मगर चार साल के भीतर दोनों की मौत हो गई थी। आखिरी लाल कंगारू की मौत अक्टूबर 2015 में हुई थी। 

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