
ट्रेडिंग डेक्स : यदि आपको कहा जाए कि आपको लंबे समय तक एक ऐसे घर में रहना है, जिसका सोने और खाने का अलग-अलग देश में पड़ता, तो आप सोचने लगेंगे कि क्या ऐसा भी संभव हो सकता है। जी हां! यह एकदम से सत्य है, दरअसल नगालैंड के एक ऐसा गांव है, जहां पर रहने वाले लोग हर दिन दो देशों के बीच खाते और रहते हैं। इतना ही नहीं इनके खेत खलिहान के कुछ हिस्से म्यामांर में पड़ते हैं तो कुछ हिस्से भारत में पड़ते हैं. यह गांव प्राकृतिक रूप से बेहद ही खूबसूरत है, जिसकी वजह से यहां पर भारी तादाद में पर्यटक आते रहते हैं। आइए जानते हैं इस गांव की क्या है खासियत...
लोंगवा को प्रकृति ने बनाया है बेहद ही खूबसूरत
यह गांव पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड के मोन जिले में स्थित है और इस गांव का नाम लोंगवा है, प्राकृतिक दृष्टि से यह गांव बेहद ही सुंदर है, दरअसल, यह गांव पहाड़ियों के बीच स्थित है, जो गांव की खूबसूरती को चार चांद लगाते हैं, इतना ही नहीं इस गांव के बीच से गुजरने वाली भारत-म्यांमार सीमा इस गांव को और भी आकर्षक बनाती है। जिसकी वजह से भारी तादद में पर्यटक यहां पर आते हैं।
भारत का आखिरी गांव
बता दें कि यह गांव के जंगलों और पहाड़ों के बीच में स्थित है और म्यांमार सीमा से सटा हुआ है, यह भारत का आखिरी गांव है। इस गांव कोंयाक आदिावासी निवास करते हैं, आमतौर पर इन्हें बेहद ही खूंखार माना जाता है। अपने कबीले की सत्ता और जमीन पर कब्जे के लिए वह अक्सर पड़ोस के गांवों से लड़ाई लड़ते रहते हैं।
मोन शहर से 42 किलोमीटर दूर स्थित है यह गांव
यह गांव नगालैंड के मोन शहर से तकरीबन 42 किलोमीटर दूर स्थित है। यहां आने के लिए नागालैंड राज्य परिवहन निगम की बसों से मोन जिले तक पहुंच कर किराए के वाहन से इस गांव तक पहुंचा जा सकता है।
ग्राम प्रधान के घर से होकर सीमा रेखा
एक दिलचस्प बात यह भी है कि म्यांमार और भारत की सीमा यहां ग्राम प्रधान के घर से होकर गुजरती है, जो प्रधान के घर को दो भागों में विभाजित करती है, जिसका एक हिस्सा भारत में पड़ता है तो एक हिस्सा म्यांमार में पड़ता है। इतना ही नहीं इस गांव के कई ऐसे घर हैं, जिसका बेडरूम भारत में पड़ता तो किचन म्यांमार में पड़ता है।
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