9 जनवरी को शुभ योग में करें सूर्यदेव की पूजा, इस दिन बिना नमक का भोजन करें और इन बातों का ध्यान रखें

Published : Jan 08, 2022, 07:15 AM IST
9 जनवरी को शुभ योग में करें सूर्यदेव की पूजा, इस दिन बिना नमक का भोजन करें और इन बातों का ध्यान रखें

सार

9 जनवरी, रविवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। रविवार को सप्तमी तिथि का योग होने से इस दिन भानु सप्तमी (Bhanu Saptami 2022) का पर्व मनाया जाएगा।  इस संयोग में वार, तिथि और महीने के स्वामी सूर्य होने से इस दिन भगवान भास्कर की पूजा का कई गुना शुभ फल मिलेगा।

उज्जैन. पुराणों का कहना है कि पौष महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि अगर रविवार को हो तो ये दिन सूर्य पर्व हो जाता है। 9 जनवरी को ऐसा ही योग बन रहा है। धर्म ग्रंथों के जानकारों का कहना है कि इस दिन व्रत और पूजा से जाने-अनजाने में हुए हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। साथ ही कई यज्ञ करने जितना पुण्य भी मिलता है। साथ ही इस दिन सर्वार्थसिद्धि और प्रवर्ध नाम के 2 शुभ योग भी बन रहे हैं।

स्कंद और पद्म पुराण में सूर्य पूजा
पौष महीने में सूर्य उपासना की परंपरा है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। स्कंद और पद्म पुराण में कहा गया है कि इस महीने में सूर्य को जल चढ़ाने से पुण्य मिलता है और पाप भी खत्म हो जाते हैं। धर्म ग्रंथों के जानकार पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र का कहना है कि वेदों में सूर्य को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। इसलिए सूर्य उपासना से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। पौष महीने में भानू सप्तमी के संयोग में भगवान सूर्य की पूजा के साथ ही दिनभर व्रत भी रखा जाता है। इस दिन व्रत के दौरान एक बार भी नमक नहीं खाया जाता। इस पर्व पर बिना नमक का व्रत करने से यश, धन और उम्र बढ़ती है।

इन बातों का रखें ध्यान
1.
भानू सप्तमी पर सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इस दिन पानी में तिल मिलाकर नहाएं। लाल कपड़े पहनें और लाल चंदन का तिलक लगाकर तांबे के लोटे में पानी भर कर सूर्य को जल चढ़ाएं। दिन में जरूरतमंद लोगों को गुड़, तिल और गर्म कपड़े दान करें।
2. स्कंद और पद्म पुराण के अनुसार सूर्य को देवताओं की श्रेणी में रखा गया है। उन्हें भक्तों को प्रत्यक्ष दर्शन देने वाला भी कहा जाता है। इसलिए पौष महीने में सूर्यदेव को जल चढ़ाने से विशेष पुण्य मिलता है।
3. पौष महीने की सप्तमी तिथि पर सूर्य को जल चढ़ाने से सम्मान मिलता है। सफलता और तरक्की के लिए भी सूर्यदेव को जल चढ़ाया जाता है। दुश्मनों पर जीत के लिए भी सूर्य को जल चढ़ाया जाता है।
4. वाल्मीकि रामायण के अनुसार युद्ध के लिए लंका जाने से पहले भगवान श्रीराम ने भी सूर्य को जल चढ़ाकर पूजा की थी। इससे उन्हें रावण पर जीत हासिल करने में मदद मिली।

 

ये खबरें भी पढ़ें...

Makar Sankranti को लेकर ज्योतिषियों में मतभेद, जानिए कब मनाया जाएगा ये पर्व 14 या 15 जनवरी को?


Makar Sankranti 2022: 3 शुभ योगों में मनाया जाएगा मकर संक्रांति उत्सव, इस पर्व से शुरू होगा देवताओं का दिन

Makar Sankranti पर ये खास चीज खाने की है परंपरा, इससे शरीर को मिलती है ताकत, पुराणों में भी है इसका जिक्र

Makar Sankranti पर सूर्यदेव के साथ करें शनिदेव के मंत्रों का भी जाप, बढ़ेगा सम्मान और कम होंगी परेशानियां

14 जनवरी को मनाई जाएगी मकर संक्रांति, देश में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है ये उत्सव

14 जनवरी को सूर्य बदलेगा राशि, खत्म होगा खर मास, इसके पहले 12 मंत्र बोलकर करें ये आसान उपाय

PREV
Spirituality News in Hindi (आध्यात्मिक खबर): Get latest spirituality news about festivals, horoscope, religion, wellness, metaphysical, parapsychology and yoga in India at Asianet News Hindi

Recommended Stories

Chandra Grahan 2026: क्या होली पर होगा चंद्र ग्रहण? जानें सच या झूठ
Makar Sankranti 2026 Muhurat: दोपहर बाद शुरू होगा मकर संक्रांति का मुहूर्त, यहां नोट करें टाइम