शनि और चंद्रमा की युति से बनता है विष योग, इसके अशुभ फल से बचने के लिए ये उपाय करें

Published : Jan 15, 2021, 11:05 AM IST
शनि और चंद्रमा की युति से बनता है विष योग, इसके अशुभ फल से बचने के लिए ये उपाय करें

सार

ज्योतिष शास्त्र में अनेक योगों का वर्णन मिलता है। ये योग दो या दो से अधिक ग्रहों के आपस में संबंध से बनते हैं। ये योग शुभ भी होते हैं और अशुभ भी। आज हम आपको विष योग के बारे में बता रहे हैं।

उज्जैन. नाम से ही पता चलता है कि ये एक अशुभ योग है। कुंडली में विष योग का निर्माण शनि और चंद्रमा की युति से होता है। यह योग व्यक्ति के लिए बेहद कष्टकारी माना जाता है। जानिए इससे जुड़ी खास बातें…

कब बनता है विष योग?

किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली के किसी स्थान में शनि और चंद्र साथ में आ जाए तो विष योग बन जाता है। इसका दुष्प्रभाव तब अधिक होता है जब आपस में इन ग्रहों की दशा-अंतर्दशा चल रही हो। विष योग के प्रभाव से व्यक्ति जीवनभर अशक्तता में रहता है। मानसिक रोगों, भ्रम, भय, अनेक प्रकार के रोगों और दुखी दांपत्य जीवन से जूझता रहता है। यह योग कुंडली के जिस भाव में होता है उसके अनुसार अशुभ फल जातक को मिलते हैं। 

जानिए किस भाव में क्या फल देता है विष योग
 

1. लग्न स्थान में विष योग बन रहा हो तो ऐसा व्यक्ति शारीरिक तौर पर बेहद अक्षम रहता है। उसे पूरा जीवन तंगहाली में गुजारना पड़ता है। लग्न में शनि-चंद्र होने पर उसका प्रभाव सीधे तौर पर सप्तम भाव पर भी होता है। इससे दांपत्य जीवन दुखपूर्ण हो जाता है।
2. दूसरे भाव में शनि-चंद्र की युति होने पर व्यक्ति जीवनभर धन के अभाव से जूझता रहता है।
3. तीसरे भाव में बना विष योग व्यक्ति का पराक्रम कमजोर कर देता है और वह अपने भाई-बहनों से कष्ट पाता है।
4. चौथे भाव सुख स्थान में शनि-चंद्र की युति होने पर सुखों में कमी आती है और मातृ सुख नहीं मिल पाता है।
5. पांचवें भाव में यह दुर्योग होने पर संतान सुख नहीं मिलता और व्यक्ति की विवेकशीलता समाप्त होती है।
6. छठे भाव में विष योग बना हुआ है तो व्यक्ति के अनेक शत्रु होते हैं और जीवनभर कर्ज में डूबा रहता है।
7. सातवें स्थान में होने पर पति-पत्नी में तलाक होने की नौबत तक आ जाती है।
8. आठवें भाव में बना विष योग व्यक्ति को मृत्यु तुल्य कष्ट देता है। दुर्घटनाएं बहुत होती हैं।
9. नौवें भाव में विष योग व्यक्ति को भाग्यहीन बनाता है। ऐसा व्यक्ति नास्तिक होता है।
10. दसवें स्थान में शनि-चंद्र की युति होने पर व्यक्ति के पद-प्रतिष्ठा में कमी आती है। पिता से विवाद रहता है।
11. ग्यारहवें भाव में विष योग व्यक्ति के बार-बार एक्सीडेंट करवाता है। आय के साधन न्यूनतम होते हैं।
12. बारहवें भाव में यह योग है तो आय से अधिक खर्च होता है।

विष योग के उपाय 
 

1. जिस व्यक्ति की कुंडली में विष योग बना हो वे शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे नारियल फोड़ें।
2. शनिवार को सरसों के तेल में काले उड़द और काले तिल डालकर दीपक जलाएं।
3. पानी से भरा घड़ा शनि या हनुमान मंदिर में दान करें।
4. हनुमानजी की आराधना से विष योग में बचाव होता है।
5. शनिवार को कुएं में कच्चा दूध डालें।

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