उज्जैन. जन्म कुंडली में कुछ खास योग ऐसे बनते हैं जो गरीब इंसान को भी अति धनवान बना देते हैं। जबकि कुछ योग ऐसे भी हैं जो धनवान व्यक्ति को भी धर्म की ओर झुकाकर संन्यासी बना देते है। आज हम आपको ऐसे ही योग के बारे में बता रहे हैं…

1. शनि यदि नवम भाव में हो और उसके ऊपर किसी ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति चक्रवती सम्राट हो तो भी संन्यासी बन जाता है।
2. यदि चंद्रमा नवम भाव में हो और उसके ऊपर किसी भी ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति की कुंडली में राजयोग होते हुए भी वह संन्यासी बन जाता है और संन्यासियों में भी परम पद की प्राप्ति करता है।
3. यदि कुंडली के लग्नेश पर कई ग्रहों की दृष्टि हो तो और दृष्टि डालने वाले ग्रह किसी एक राशि में ही हों तो भी संन्यास योग प्रबल होता है।
4. दशमेश दूसरे चार ग्रहों के साथ केंद्र त्रिकोण में हो तो मानव के जीवन में विरक्ति का भाव पैदा होता है।
5. यदि कुंडली में नवमेश बली होकर नौवें या पांचवें स्थान पर हो और उस पर वृहस्पति और शुक्र की दृष्टि हो या वह वृहस्पति और शुक्र के साथ हो तो व्यक्ति अव्वल दर्जे का संन्यासी बनता है।
6. दशम स्थान पर तीन ग्रह बली हों और दशमेश भी बली हों तो सर्वश्रेष्ठ संन्यासी होता है।
7. यदि लग्नेश वृहस्पति, मंगल या शुक्र में से कोई एक हो और लग्नेश पर शनि की दृष्टि हो और गुरु नवम भाव में बैठा हो तो व्यक्ति तीर्थनाम का संन्यासी होता है ।

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