अंक ज्योतिष प्राचीन समय से ही काफी प्रचलित विधा है। इसके माध्य्म से किसी भी व्यक्ति के भूत, वर्तमान और भविष्य के बारे में जाना जा सकता है। इस विधा का मुख्य आधार जन्म तारीख होती है। इसे अंग्रेजी में न्यूमरोलाजी भी कहते हैं।
अंक ज्योतिष भी भविष्य जानने की एक प्राचीन विधा है। इसमें जन्म तारीख के अंकों को जोड़कर मूलांक, जन्मांक और भाग्यांक निकाले जाते हैं। इन्हीं के आधार पर व्यक्ति के भूत, भविष्य और वर्तमान के बारे में गणना की जाती है।
Ank Rashifal March 2023: अंकों का हमारे जीवन में बहुत ही खास महत्व है। अगर ये कहा जाए कि अंक हमारे जीवन को अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करते है तो गलत नहीं होगा। अंक ज्योतिष भी वैदिक ज्योतिष से प्रभावित है, इसे न्यूमरोलॉजी कहते हैं।
अंक यानी नंबर, इससे जुड़ी ज्योतिष विधा को अंग्रेजी में न्यूमरोलॉजी कहते हैं। वैसे तो ये विधा भारतीय ज्योतिष से प्रभावित है, लेकिन इसे पाश्चात्य विधा माना जाता है। इसमें जन्म तारीख के आधार पर व्यक्ति के भूत-भविष्य और वर्तमान के बारे में जाना जाता है।
Numerology Rashifal: अंक ज्योतिष से भी भविष्य के बारे में काफी कुछ जाना जा सकता है। अंक ज्योतिष में कुल 9 अंक होते हैं, इन्ही अंकों के माध्यम से भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में जाना जा सकता है।
अंक ज्योतिष को आज भले ही पाश्चात्य विधा कहा जाता है, लेकिन ये वैदिक ज्योतिष से ही प्रभावित है। इसका कारण यह है कि हर अंक किसी न किसी ग्रह से संबंधित है और उसी के आधार पर प्रीडिक्शन की जाती है।
अंकों के बिना हमारा जीवन अधूरा है। इतना ही महत्व अंक शास्त्र का भी है। अंक शास्त्र के अनुसार 1 से लेकर 9 अंक तक सभी किसी न किसी ग्रह से संबंधित हैं, इसलिए अप्रत्यक्ष तौर पर अंक शास्त्र वैदिक ज्योतिष से ही प्रभावित है।
वैसे तो अंक ज्योतिष का संबंध पुरातन वैदिक ज्योतिष से है, लेकिन वर्तमान में ये पश्चिमी देशों में अधिक प्रचलित है, इसलिए इसे पाश्चात्य विधा भी कहा जाता है। पहले के समय में ये संख्या शास्त्र का ही एक अंग हुआ करती थी।
अंक ज्योतिष भी वैदिक ज्योतिष की तरह लोगों के आने वाले भविष्य के बारे में बताने का एक माध्यम है। वर्तमान में ये काफी प्रचलित है। इसमें किसी भी व्यक्ति के डेट ऑफ बर्थ के आधार पर मूलांक निकालकर प्रीडिक्शन की जाती है।
अंक शास्त्र के बारे में तो सभी जानते हैं, लेकिन ये कैसे काम करता है, इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। अंक शास्त्र पूरी तरह से डेट ऑफ बर्थ पर आधारित है। जन्म तारीख से ही मूलांक, जन्मांक आदि निकाले जाते हैं और गणना की जाती है।