राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस सीच पर बीजेपी कभी नहीं जीत सकी हैं। लेकिन, इस बार अपना खाता खोलने और सतीश कुमार को अपने पिछले चुनाव का हिसाब बराबर करने का सुनहरा मौका है, क्योंकि इस बार बीजेपी, जेडीयू साथ हैं, जबकि पिछली बार जेडीयू, आरजेडी के साथ थी, तब तेजस्वी यादव जीते थे। इतना ही नहीं यहां जेडीयू कई बार जीत भी चुकी हैं। खुद सुनील कुमार 2010 में राबड़ी देवी को हराकर विधायक बने थे। 

पटना (Bihar)। महागठबंधन से सीएम फेस तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav)इस बार भी राघोपुर सीट (Raghopur Seat) से चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट को को लालू परिवार (Lalu Family) के लिए मजबूत गढ़ माना जाता है, क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav), राबड़ी देवी (Rabri Devi) दो-दो बार और अब उनके बेटे तेजस्वी यादव यहां से एक बार विधायक बन चुके हैं। वे दूसरी बार यहां से मैदान में हैं। उनका मुकाबला साल 2010 में राबड़ी देवी को हराकर जेडीयू (JDU) से विधायक बनने वाले सतीश कुमार (Satish Kumar) से हैं, जो इस बार भाजपा (BJP) के प्रत्याशी हैं। वैसे यहां 15 प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं। बता दें कि इस सीट से कभी बीजेपी नहीं जीती है, जिसके पास कमल खिलाने का अच्छा मौका है। वजह जेडीयू भी उसके साथ है,जो पिछले चुनाव में तेजस्वी यादव के साथ थी।

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तेजस्वी से पिछली बार हार चुके हैं सतीश
सतीश कुमार साल 2010 के चुनाव में जदयू प्रत्याशी के रूप में राबड़ी देवी को हरा कर विधायक बने थे। अगले चुनाव में टिकट नहीं मिली तो वे भाजपा में शामिल हो गए।, लेकिन उन्हें काफी बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

राजनीति के जानकार कह रहे ये बातें
राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस सीट पर बीजेपी कभी नहीं जीत सकी हैं। लेकिन, इस बार अपना खाता खोलने और सतीश कुमार को अपने पिछले चुनाव का हिसाब बराबर करने का सुनहरा मौका है, क्योंकि इस बार बीजेपी, जेडीयू साथ हैं, जबकि पिछली बार जेडीयू, आरजेडी के साथ थी, तब तेजस्वी यादव जीते थे। इतना ही नहीं यहां जेडीयू कई बार जीत भी चुकी हैं। खुद सुनील कुमार 2010 में राबड़ी देवी को हराकर विधायक बने थे।

गैर यादव वोटर्स की भूमिका निर्णायक
यादव बहुल इस विधानसभा क्षेत्र में गैर यादव वोटरों की भूमिका निर्णायक होती है। माना जाता है कि उनका झुकाव जिधर होता है, जीत उसी की होती है। इस बार जहां तेजस्वी की हार तय करने के लिए जेडीयू ने पूर्व विधायक और इस इलाके के दिग्गज भोला राय को पार्टी में शामिल कराया। वहीं, तेजस्वी ने यहां विजेता तय करने वाले राजपूत वोटरों को प्रभावित करने के लिए पूर्व सांसद रामा सिंह की पत्नी को बगल की महनार सीट से उम्मीदवार बनाया है। उनका आंकलन है कि वे कुछ तो राजपूत वोट उनको दिलवाएंगे।

पांच साल में 3.56 करोड़ बढ़ गई है तेजस्वी की दौलत
साल 2014 में तेजस्वी यादव जब पहली बार राजनीति में आए तो उनके पास 2.32 करोड़ रुपए की संपत्ति थी। वो राघोपुर से विधायक बनने के बाद डेढ़ साल तक डिप्टी सीएम रहे। इसके बाद नेता विपक्ष की भूमिका में रहे। लेकिन, दूसरी बार राघोपुर से विधायक बनने का सपना संजोए लालू के इस बेटे ने अपने पास 5.88 करोड़ रुपए संपत्ति होने की बात बताई है। तेजस्वी यादव की संपत्ति पांच साल में 3.56 करोड़ रुपए बढ़ गई है। लेकिन टैक्स उनका कम ही होता जा रहा है। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है कि उन्होंने 2015-16 में 39.80 लाख रुपए का टैक्स दिया था। जबकि, उन्होंने 2016-17 में तेजस्वी ने 34.70 लाख रुपए, 2017-18 में 10.93 लाख रुपए और 2018-19 में 1.41 लाख रुपए आईटीआर भरा है। वहीं, 2019-20 में सिर्फ 2.89 लाख रुपए का टैक्स जमा किए हैं। 

तेजस्वी पर दर्ज है 11 क्रिमिनल केस
तेजस्वी ने अपने ऊपर 11 केस दर्ज होने की बात कही है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग, आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी जैसे 7 क्रिमिनल केस दर्ज होने की बात कही है। क्रिमिनल केस के अलावा तेजस्वी के ऊपर 4 सिविल केस भी चल रहे हैं। बता दें कि पिछली चुनाव में दोनों के ऊपर एक-एक केस दर्ज थे।

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