कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों चर्चा में हैं। उन्हें भांजे तेजस्वी यादव का विवाह रास नहीं आया है। तेजप्रताप यादव ने अपने सगे मामा को धमकी दी है। 

पटना। कभी बिहार की राजनीति के सबसे बड़े बाहुबली रहे साधु यादव इन दिनों फिर चर्चा में हैं। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के छोटे बेटे तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने यादव समाज से बाहर की लड़की से विवाह किया तो साधु भड़क गए और इसे कलंक करार दिया। लालू यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भाई को भांजे का विवाह रास नहीं आया। 

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सगे मामा ने जुबानी हमला किया तो जवाब देने तेजस्वी यादव के बड़े भाई तेजप्रताप यादव सामने आ गए। ठेठ देसी अंदाज में कह दिया 'रुकऽअ हम आऽवतानी बिहार तऽ गर्दा उड़ाऽव तानी तोहार...। तेजप्रताप आज जिस साधु यादव को गर्दा उड़ाने की धमकी दे रहे हैं कभी बिहार में उनकी तूती बोलती थी। लालू-राबड़ी राज में साधु जो चाहे करते, उन्हें कोई रोकने वाला नहीं था। 

पूरे बिहार में थी धाक
रेप, हत्या की कोशिश और रंगदारी के कई मामलों में आरोपी साधु यादव पर प्रकाश झा ने फिल्म 'गंगाजल' बनाया था। अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में दिखाया गया था कि बिहार में नेता किस कदर अपराध की दुनिया से जुड़े हैं। फिल्म में विलेन का नाम साधु यादव था। राबड़ी देवी के भाई और लालू यादव के साले साधु यादव की जीजा और दीदी के शासनकाल में पूरे बिहार में धाक थी। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि विरोध कर सके। 90 के दशक में साधु की खबरें अखबारों में छाई रहती थी। बाहुबली और दबंग भी साधु के रास्ते में नहीं आना चाहते थे। किसी अधिकारी या अपराधी की इतनी हिम्मत नहीं थी कि साधु से पंगा ले सके। बिजनेसमैन तो किसी तरह अपना कारोबार बचाकर रखते थे ताकि साधु की नजर नहीं पड़े।

शिल्पी हत्याकांड में आया था नाम
साधु यादव पर गोली चलाकर दहशत फैलाने, हत्या की कोशिश, रंगदारी नहीं देने पर पीटने, दंगा फैलाने और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने समेत कई आरोप लगे। बाढ़ राहत घोटाले में आईएएस गौतम गोस्वामी को जेल जाना पड़ा था। उनकी रहस्यमय स्थिति में मौत हो गई थी। इस मामले में साधु यादव का नाम आया था और उन्हें सरेंडर करना पड़ा था। 

चर्चित शिल्पी जैन हत्या कांड में भी साधु यादव का नाम आया। सीबीआई ने साधु से डीएनए टेस्ट कराने को कहा, लेकिन साधु ने इनकार कर दिया। कहा जाता है कि अकेले साधु यादव की इतनी ताकत नहीं थी कि वह कुछ कर पाते। लालू यादव ने अपने सालों साधु यादव और सुभाष यादव को दबंगई के लिए इस्तेमाल किया था। वह इनकी बदौलत अपनी राजनीति चला रहे थे। लालू यादव की सबसे ज्यादा बदनामी साधु और सुभाष के चलते हुई।

2005 में जब जंगलराज के मुद्दे पर लालू यादव को बिहार की सत्ता से बेदखल कर दिया गया तब से साधु यादव के सितारे आसमान से गर्त की ओर गिरने लगे। लालू ने साधु से किनारा कर लिया। बाद में साधु यादव का लालू आवास में आना-जाना बंद हो गया। तेजस्वी की शादी में साधु को न्योता तक नहीं मिला।

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