नर्गिस दत्त का  उर्दू में एक आर्टिकल उस वक्त छपा था, जिस वक्त मीना कुमारी की मौत हुई थी। अपनी खास दोस्त की मौत पर नर्गिस की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बात की ख़ुशी भी थी कि वे प्रताड़ना से मुक्त हो गई थीं।

एंटरटेनमेंट डेस्क. गुज़रे ज़माने की पॉपुलर एक्ट्रेस और अभिनेता संजय दत्त (Sanjay Dutt) की मां नर्गिस (Nargis) की आज 93वीं बर्थ एनिवर्सरी है। 1 जून 1929 को जन्मी नर्गिस अपनी समकालीन मीना कुमारी (Meena Kumari) की बहुत अच्छी दोस्त थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब मीना कुमारी की मौत हुई थी, तब नर्गिस ने कहा था, "मौत मुबारक हो, अब इस दुनिया में लौटकर कभी मत आना। यह दुनिया आप जैसे लोगों के लिए नहीं है।" नर्गिस का यह बयान उर्दू में छपे एक आर्टिकल में शामिल था।

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इस वजह से नर्गिस ने कहा था ऐसा

दरअसल, मीना कुमारी ने डायरेक्टर-प्रोड्यूसर कमाल अमरोही से शादी की थी। उनकी शादीशुदा जिन्दगी काफी बुरे दौर से गुजरी थी। कमाल ने मीना कुमारी पर कई तरह की बंदिशें लगा दी थीं। नर्गिस के मुताबिक़, जब उनके पति सुनील दत्त मीना कुमारी के साथ फिल्म 'मैं चुप रहूंगी' की शूटिंग कर रहे थे, तब उन्होंने बच्चों के साथ उन्हें भी सेट पर बुला लिया। इसी दौरान मीना से उनकी अच्छी दोस्ती हो गई थी।

रात में पिटाई की आवाजें आईं, सुबह आंखें सूजी मिलीं

नर्गिस ने आर्टिकल में बताया था कि एक रात उन्होंने जब मीना को गार्डन में बहुत हांफते हुए देखा तो उन्होंने उन्हें आराम की सलाह दी। लेकिन मीना ने जवाब दिया कि बाजी (जो वे नर्गिस को बुलाती थीं) आराम मेरी तकदीर में नहीं है। नर्गिस ने आर्टिकल में यह भी लिखा था कि उन्होंने उसी रात मीना के रूम के अंदर से मारपीट की आवाजें सुनी थीं और अगली सुबह जब वे उनसे मिलीं तो उनकी आंखें सूजी हुई थीं।

नर्गिस के मुताबिक़, मीना के साथ मारपीट कमाल अमरोही के सेक्रेटरी ने की थी। लेकिन वे इस बात से ज्यादा परेशान थीं कि सबकुछ जानने के बाद भी कमाल ने अपने सेक्रेटरी को कुछ नहीं कहा था।

रोने वाले सीन के लिए नहीं पड़ती थी ग्लिसरीन की ज़रुरत

नर्गिस मीना कुमारी की दुःख भरी जिंदगी से वे काफी उदास थीं। बताया जाता है कि मीना कुमारी इतनी दुखी रहती थीं कि उन्हें फिल्मों की शूटिंग में रोने वाले सीन्स के लिए ग्लिसरीन की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। लेकिन लोग उनके इतने बड़े प्रशंसक थे कि उनके बालों का ताबीज बनाकर पहना करते थे।

नर्गिस के करियर पर एक नज़र

खैर बात नर्गिस की करें तो जाने-माने अभिनेता अनवर हुसैन की छोटी बहन होने के नाते फिल्मों में उनका आना पहले से ही तय था। वे पहली बार 1935 में आई फिल्म 'तलाश-ए-हक' में नज़र आई थीं। तब उनकी उम्र महज 6 साल रही होगी। जब वे 14 साल की हुईं तो उन्होंने महबूब खान की फिल्म 'तकदीर में मोतीलाल के अपोजिट हीरोइन का रोल किया। फिल्म की सफलता के बाद नर्गिस ने कभी पलटकर नहीं देखा। राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया और यही वजह है कि दोनों ने 'आवारा', 'श्री 420', 'अंदाज़' और 'आग' 'बरसात' जैसी 16 फिल्मों में साथ काम किया। नर्गिस को भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाज़ा। सुनील दत्त के साथ वाली उनकी फिल्म 'मदर इंडिया' ऑस्कर के लिए नॉमिनेट हुई थी। फिल्म 'रात और दिन' के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था।

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