Budget 2026: सैलरी वालों को सीधा ₹1.14 लाख फायदा! पूरा कैलकुलेशन समझिए
Budget 2026: 1 फरवरी को देश का बजट पेश होने वाला है। इस बार मिडिल क्लास को सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के बदलाव और नई टैक्स स्लैब्स की वजह से FY 2026-27 में आपकी टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है। जानिए ₹1.14 लाख कैसे बचा सकते हैं?

नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 से क्या बदला?
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इनकम टैक्स एक्ट 2025 (Income Tax Act 2025) का मुख्य मकसद टैक्स सिस्टम को आसान और मॉर्डन बनाना है। इस नए कानून में पुरानी और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाया गया है और भाषा को सरल बनाया गया है ताकि आम आदमी आसानी से समझ सके। इसके अलावा पुराने टैक्स नियमों को restructure किया गया है ताकि compliance आसान हो और middle class taxpayers को सीधे फायदा मिल सके। इसका मतलब यह हुआ कि अब टैक्स भरने के नियम आपके लिए ज्यादा straightforward होंगे और आपको समय और पैसा दोनों बचाने का मौका मिलेगा।
ओल्ड vs न्यू टैक्स रिजीम का आपकी जेब पर असर
भारत में टैक्सपेयर्स के पास ओल्ड और न्यू दोनों तरह के टैक्स रिजीम के विकल्प हैं। ओल्ड रिजीम में 30% की मैक्सिमम टैक्स दर ₹10 लाख से ज्यादा की इनकम पर लागू होती है और इसमें कई डिडक्शंस और छूट मिलते हैं। वहीं, न्यू रिजीम को 2020 में पेश किया गया था ताकि कंप्लायंस आसान हो जाए, इसमें रेट्स कम किए गए और ज्यादातर डिडक्शन हटा दिए गए। FY 2025-26 के बाद न्यू रिजीम में 30% की मैक्सिमम रेट ₹24 लाख से ज्यादा की इनकम पर लागू होती है। इस बदलाव का सीधा असर यह हुआ कि अब मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स के लिए बढ़ी हुई छूट (Enhanced Rebate) के जरिए ₹12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता और जो ₹24 लाख से ऊपर कमाते हैं, वे FY 2024-25 की तुलना में लगभग 1,14,400 रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आपकी टेक होम सैलरी में सीधे इजाफा होगा और स्लैब एडजेस्टमेंट्स का असली फायदा आपको मिलेगा।
क्यों 24 लाख रुपए अब पर्याप्त नहीं हैं?
न्यू रिजीम ने कई फायदे दिए हैं, लेकिन 30% की मैक्सिमम टैक्स दर अब कई लोगों के लिए भारी लग सकती है। साल दर साल लिविंग कॉस्ट्स बढ़ती जा रही हैं, जबकि टैक्स स्लैब्स उतने ही रह गए हैं, जिससे इफेक्टिव टैक्स बर्डन (Effective Tax Burden) भी बढ़ता है। इसके अलावा मेट्रो सिटीज में प्रोफेशनल्स जल्दी ही ₹24 लाख की इनकम पार कर लेते हैं, जिससे वे जल्दी ही हायर टैक्स स्लैब में फंस जाते हैं। यह रेट उन लोगों के लिए पेनाल्टी वाला लग सकता है, जिनकी लिविंग कॉट्स ज्यादा हैं। साथ ही, कई मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स PF से बाहर हैं और सरकार की हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम्स में भी नहीं आते, इसलिए उनके लिए हायर नेट अर्निंग होना जरूरी है ताकि वे NPS या अन्य रिटायरमेंट स्कीम्स में योगदान कर सकें।
दुनिया में कहां कितना टैक्स?
दुनिया के कई देशों में हाई इनकम टैक्सपेयर्स के लिए थ्रेसहोल्ड भारत से कहीं ज्यादा हैं। जैसे, चीन में 30% की दर CNY 420,000 यानी लगभग ₹55 लाख से ऊपर की इनकम पर लागू होती है। वहीं, UK जैसे देशों में पर्सनल अलाउंस हर साल इंफ्लेशन के हिसाब से एडजेस्ट होता है, ताकि टैक्सपेयर्स का इफेक्टिव बर्डन बढ़े नहीं। भारत में ऐसा मैकेनिज्म नहीं है, जिससे मिडिल क्लास पर अनपेक्षित कर दबाव पड़ता है। बजट 2026 में ऑटोमैटिक एडजेस्टमेंट मैकेनिज्म अपनाया गया तो यह फेयरनेस और प्रेडिक्टिबिलिटी बढ़ा सकता है।
बजट 2026 में मिडिल क्लास के लिए संभावित फायदे
बजट 2026 से उम्मीद है कि हाईएस्ट स्लैब थ्रेसहोल्ड बढ़ाया जाएगा और 30% टैक्स अब ₹40 लाख तक लागू किया जा सकता है। इसके अलावा स्लैब एडजेस्टमेंट्स और बढ़ी हुई छूट के जरिए टेक होम सैलरी में इजाफा होगा। PF या NPS कॉन्ट्रीब्यूशन करने वाले एम्प्लॉइज के लिए रिटायरमेंट सिक्योरिटी भी बेहतर होगी। इन बदलावों का मतलब है कि मिडिल क्लास की जेब में ज्यादा पैसा रहेगा और कॉम्प्लिकेटेड डिडक्शंस या आउटडेटेड प्रोविजंस के कारण उन्हें नुकसान नहीं होगा।
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