पति-पत्नी का मिलकर घर खरीदने से लोन लिमिट बढ़ती है, पर नए टैक्स सिस्टम में फायदे सीमित हैं। लोन की जिम्मेदारी बराबर होती है, इसलिए प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी (जैसे 50:50) और भविष्य की योजना स्पष्ट करना ज़रूरी है।
भारत में पति-पत्नी का मिलकर घर खरीदना काफी आम है, खासकर तब, जब दोनों ही नौकरी करते हों। ऐसा करने से लोन आसानी से मिल जाता है और टैक्स में भी छूट मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन सिर्फ पैसों का फायदा देखकर यह फैसला लेना कई बार भारी पड़ सकता है। प्रॉपर्टी के मालिकाना हक, लोन चुकाने की जिम्मेदारी और भविष्य की प्लानिंग को लेकर पूरी तरह साफ होना जरूरी है। आइए जानते हैं कि मिलकर घर खरीदते समय किन खास बातों का ध्यान रखना चाहिए।
लोन की लिमिट बढ़ जाती है
जब पति-पत्नी दोनों की इनकम को एक साथ जोड़ा जाता है, तो बैंक से ज्यादा लोन मिलने की गुंजाइश बढ़ जाती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपनी क्षमता से ज्यादा लोन ले लें। ज्यादा लोन का मतलब है बड़ी EMI, जो भविष्य में आपके लिए बोझ बन सकती है। इसलिए, लोन लेने से पहले अपनी चुकाने की क्षमता का सही-सही अंदाजा जरूर लगा लें।
नए टैक्स सिस्टम में हुए बदलाव
सिर्फ टैक्स बचाने के लिए अपने पार्टनर को को-ओनर (Co-owner) बनाना अब समझदारी नहीं है। पुराने टैक्स सिस्टम (Old Tax Regime) में सेक्शन 24(b) और 80C के तहत होम लोन के ब्याज और मूलधन, दोनों पर पति-पत्नी अलग-अलग टैक्स छूट का दावा कर सकते थे। लेकिन नए टैक्स सिस्टम (New Tax Regime) में खुद के रहने वाले घर पर यह छूट उपलब्ध नहीं है। इसलिए, पहले यह तय कर लें कि आप कौन-सा टैक्स सिस्टम चुन रहे हैं।
जिम्मेदारी दोनों की बराबर
बैंक के लिए आप दोनों लोन चुकाने के लिए बराबर के जिम्मेदार हैं। अगर भविष्य में किसी एक पार्टनर की नौकरी चली जाती है या कोई आर्थिक संकट आता है, तब भी लोन की किस्त समय पर चुकानी होगी। इसलिए, ऐसी किसी भी इमरजेंसी की स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही आपस में बात करके एक प्लान तैयार रखें।
ओनरशिप शेयर साफ-साफ लिखवाएं
प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराते समय कागजों में यह साफ तौर पर लिखवाएं कि किसका कितना हिस्सा है। अगर दोनों ने बराबर पैसा लगाया है, तो 50:50 का अनुपात रखें। अगर किसी ने कम या ज्यादा पैसा लगाया है, तो उसी अनुपात में मालिकाना हक दर्ज कराएं। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय भी आपको अपने-अपने मालिकाना हक का प्रतिशत बताना होता है।
भविष्य को सुरक्षित बनाएं
भविष्य में तलाक, किसी एक पार्टनर की अचानक मृत्यु या जायदाद को लेकर होने वाले झगड़े बड़ी कानूनी मुसीबतें खड़ी कर सकते हैं। इसलिए, घर के कागजात, लोन के डॉक्यूमेंट्स, नॉमिनेशन (Nomination) और वसीयत (Will) को हमेशा अपडेट रखें। इससे बाद में परिवार को होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है। सिर्फ बैंक या बिल्डर के कहने पर जॉइंट ओनरशिप में घर न खरीदें, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरतों को अच्छी तरह समझने के बाद ही कोई फैसला लें।
