केंद्र सरकार ने सौर पीवी मॉड्यूल के मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके लिए पीएलआई को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत कई रोजगार का भी सृजन होगा। 

बिजनेस डेस्कः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश में उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएलआई योजना को मंजूरी दे दी है। इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट भी किया है। ट्वीट में उन्होंने इससे होने वाले फायदे को गिनाया है। साथ ही यह भी बताया है कि पीएलआई योजना क्या है। 

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प्रस्ताव को दी गई मंजूरी
बैठक में मंजूरी दिए जाने के बाद एक आधिकारिक विज्ञप्ति भी जारी की गई। इसके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। जिसमें नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल्स पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के लिये 19,500 करोड़ रुपये के व्यय के साथ पीएलआई योजना (दूसरा चरण) के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। जानकारी दें कि इससे क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से करीब 94,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। 

रोजगार का होगा सृजन
इस पहल से 1000 मेगावॉट क्षमता के उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल्स के विनिर्माण की क्षमता प्राप्त हो सकेगा। इसका उद्देश्य भारत में उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के विनिर्माण के लिए एक परिवेश तैयार करना है। इके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करना है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल को भी मजबूत करेगा। साथ ही रोजगार भी पैदा करेगा

पांच साल के लिए पीएलआई का होगा वितरण
सोलर पीवी निर्माताओं को पारदर्शी चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुना जाएगा। सौर फोटोवोल्टिक विनिर्माण संयंत्रों के चालू होने के बाद घरेलू बाजार से उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल की बिक्री पर प्रोत्साहन स्वरूप पांच साल के लिये पीएलआई का वितरण किया जाएगा।

योजना के कारण होगा बड़ा निवेश
इसमें कहा गया है कि योजना से प्रत्यक्ष रूप से करीब 94,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा। साथ ही ईवीए, सौर ग्लास आदि जैसी अन्य सामाग्रियों की विनिर्माण क्षमता सृजित होगी। इसके अलावा इससे प्रत्यक्ष रूप से 1,95,000 तथा परोक्ष रूप से 7,80,000 रोजगार सृजित होंगे। इससे करीब 1.37 लाख करोड़ रुपये के आयात में कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा सौर पीवी मॉड्यूल में दक्षता में सुधार के लिए अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। 

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