Economic Survey 2026 Highlights: दुनिया में जंग और मंदी की चिंता के बीच इकोनॉमिक सर्वे बताता है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। FY27 में GDP ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है, महंगाई काबू में है, नौकरी-खेती से अच्छे संकेत मिल रहे हैं।
Economic Survey 2026 Key Points: एक तरफ ट्रंप के टैरिफ की मार, ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपियन कंट्रीज से खींचतान और दूसरी तरफ ईरान-अमेरिका से लेकर रूस-यूक्रेन तक तनाव चल रहा है। दुनिया जंग, महंगाई और मंदी के डर से जूझ रही है। कई बड़े देश अपनी ग्रोथ को लेकर परेशान हैं। ऐसे माहौल में भारत की अर्थव्यवस्था की तस्वीर क्या कहती है? इसी का पूरा हाल बताता है इकोनॉमिक सर्वे 2026, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज 29 जनवरी को संसद में पेश किया। देश के इस सालाना 'इकोनॉमी रिपोर्ट कार्ड' में साफ संकेत मिलते हैं कि ग्लोबल टेंशन के बावजूद भारत की रफ्तार बनी हुई है। जीडीपी से लेकर नौकरी, खेती, महंगाई और विदेशी मुद्रा तक, हर आम आदमी से जुड़ी बातों पर इसमें खुलकर बात की गई है।
भारत की GDP: मुश्किल दौर में भी मजबूत चाल
इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष यानी FY27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। यह तब है, जब दुनिया के कई देश धीमी ग्रोथ से जूझ रहे हैं। चालू वित्त वर्ष FY26 में ग्रोथ 7.4% रहने की उम्मीद है, जो RBI के अनुमान से भी थोड़ी ज्यादा है। इसका मतलब साफ है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत जमीन पर खड़ी है।
महंगाई को लेकर राहत वाली खबर
महंगाई आम आदमी की सबसे बड़ी चिंता होती है। इस मोर्चे पर भी सर्वे से राहत मिलती है। RBI और IMF दोनों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई काबू में रहेगी। अच्छी खरीफ फसल और रबी की बेहतर बुआई की वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव कम हुआ है। RBI ने FY26 के लिए महंगाई का अनुमान घटाकर 2% कर दिया है। FY27 की पहली छमाही में महंगाई 4% के आसपास रह सकती है, जो तय दायरे के अंदर है।
नौकरी और रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं
भारत की वर्कफोर्स 56 करोड़ से ज्यादा की है। सर्वे बताता है कि टैक्स सुधार, आसान नियम और राज्यों के लेबर सुधारों से इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर में भर्तियां बढ़ी हैं। खास बात यह है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एक साल में 6% की बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ FY24 में इस सेक्टर से 10 लाख से ज्यादा नई नौकरियां जुड़ीं। गिग वर्क यानी फ्रीलांस और ऐप बेस्ड काम भी अब कमाई का बड़ा जरिया बन रहा है। सरकार एक ऐसे डिजिटल सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे युवाओं की स्किल और कंपनियों की जरूरत के बीच का अंतर कम किया जा सके।
खेती-किसानी: मजबूत फसल, कम महंगाई
देश की करीब आधी आबादी खेती पर निर्भर है। ऐसे में इस सेक्टर की सेहत बेहद जरूरी है। इकोनॉमिक सर्वे के अनुसार FY26 में खेती की ग्रोथ 3.1% रह सकती है। 2024-25 में अनाज का उत्पादन रिकॉर्ड 3,320 लाख टन तक पहुंच गया। अच्छी पैदावार का सीधा फायदा महंगाई पर पड़ा है और खाने की चीजें ज्यादा महंगी नहीं हुईं।
सरकारी कर्ज और घाटा
सरकार ने राजकोषीय घाटा कम करने का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया है। FY25 में यह GDP का 4.8% रहा, जबकि FY26 के लिए लक्ष्य 4.4% रखा गया है। सरल भाषा में समझें तो सरकार अब अपनी कमाई के हिसाब से खर्च को कंट्रोल कर रही है। इससे इकोनॉमी मजबूत होती है और महंगाई पर भी लगाम रहती है।
विदेशी मुद्रा भंडार
दुनिया में मंदी की चर्चा के बीच भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना हुआ है। 2023-24 में यह 668 बिलियन डॉलर था, जो 2024-25 में बढ़कर 701 बिलियन डॉलर हो गया। जितना ज्यादा फॉरेक्स रिजर्व, उतना मजबूत रुपया और उतना ही भरोसा विदेशी निवेशकों का बना हुआ है।
एक्सपोर्ट: दुनिया में भारत की पकड़
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारत का कुल एक्सपोर्ट FY25 में रिकॉर्ड 825.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें सामान और सर्विस दोनों शामिल हैं। इकोनॉमिक सर्वे बताता है कि अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भी अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत का गुड्स एक्सपोर्ट 2.4% बढ़ा। सर्विस एक्सपोर्ट में तो 6.5% की मजबूत बढ़ोतरी हुई है।


