Gold Price 9 August: 9 अगस्त को सोने की कीमतों में भारी तेज़ी दर्ज की गई. वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों ने सोने में जमकर खरीदारी की, जिससे इसे 8 महीनों में अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त मिली.
Gold Price Today: सोने की कीमतों में 9 अगस्त को जोरदार तेजी देखने को मिली। बीते एक हफ्ते में सोने के दाम करीब 7 फीसदी तक बढ़े हैं। यह पिछले आठ महीनों में सोने की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त बताई जा रही है। इस तेजी के साथ एक बार फिर निवेशकों का भरोसा सोने पर मजबूत होता नजर आ रहा है।
वैश्विक बाजारों की उथल-पुथल का असर
दुनियाभर के बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। शेयर बाजार और दूसरे जोखिम वाले एसेट्स में उतार-चढ़ाव बढ़ने पर सोने की मांग बढ़ जाती है। मौजूदा तेजी में भी निवेशकों की इसी बढ़ती दिलचस्पी का असर सोने की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
आर्थिक अनिश्चितता बनी बड़ी वजह
सोने में तेजी की प्रमुख वजहों में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को माना जा रहा है। जब अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं या बाजार में अस्थिरता आती है, तो निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले सोने में पैसा लगाना पसंद करते हैं। इसी वजह से सोने की खरीदारी बढ़ने पर इसकी कीमतों को भी मजबूती मिलती है।
भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ता है सोने का आकर्षण
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की मांग को प्रभावित करता है। ऐसे माहौल में निवेशक अपने पोर्टफोलियो में जोखिम कम करने के लिए सोने का हिस्सा बढ़ाते हैं। सोने को लंबे समय से 'सेफ-हेवन' यानी सुरक्षित पनाहगाह माना जाता है, इसलिए संकट के समय इसकी मांग अक्सर बढ़ जाती है।
घरेलू बाजार में भी दिख सकता है असर
रिपोर्ट में दिल्ली और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों के लिए सोने के अलग-अलग भाव उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। हालांकि, वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में आई तेजी का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी पड़ता है। स्थानीय बाजार में वास्तविक भाव शहर, शुद्धता और ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज के आधार पर अलग हो सकते हैं।
निवेशकों की बढ़ती खरीदारी से कीमतों को सहारा
सोने में बढ़ती खरीदारी ने इसकी कीमतों को मजबूत सहारा दिया है। करीब 7 फीसदी की साप्ताहिक बढ़त यह संकेत देती है कि मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का झुकाव कीमती धातु की ओर बढ़ा है। हालांकि, सोने में निवेश से पहले कीमतों में आने वाले उतार-चढ़ाव और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है।
