सरकारी विभाग इन साइकिलों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीद कर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित करते हैं। प्रीमियम और बच्चों की साइकिल (लगभग 40 प्रतिशत) की मांग फिटनेस और आराम की जरूरतों से प्रेरित है।

बिजनेस डेस्क. देश में साइकिल की मांग एक बार फिर से जोर पकड़ सकती है। क्रिसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के साइकिल उद्योग की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में दशक भर के उच्चस्तर 20 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। चालू वित्त वर्ष 2021-22 में साइकिल की बिक्री बढ़कर 1.45 करोड़ इकाई पर पहुंच सकती है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 1.2 करोड़ इकाई का रहा था।

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क्या कहा गया है रिपोर्ट में
रिपोर्ट में कहा गया कि कोरोना महामारी की वजह से इस वित्त वर्ष में साइकिल उद्योग एक दशक की ऊंची वृद्धि दर्ज कर सकता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा साइकिल निर्माता देश है। साइकिल उद्योग को चार वर्ग स्टैंडर्ड, प्रीमियम, किड्स और निर्यात में बांटा गया है। स्टैंडर्ड का बाजार सबसे बड़ा है।

टेंडर प्रक्रिया
सरकारी विभाग इन साइकिलों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से खरीद कर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित करते हैं। प्रीमियम और बच्चों की साइकिल (लगभग 40 प्रतिशत) की मांग फिटनेस और आराम की जरूरतों से प्रेरित है। अन्य प्रकार की साइकिलों का निर्यात और बिक्री शेष 10 प्रतिशत मांग का गठन करती है।

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किस कारण बढ़ी मांग
क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है यह सिर्फ संगठित क्षेत्र का अनुमान है। जिसकी कुल उद्योग में हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा महामारी के दौर में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ने से साइकिलों की मांग बढ़ी है। क्रिसिल रेटिंग्स के निदेशक नितेश जैन ने कहा, ''महामारी की वजह से शरीर को स्वस्थ रखने तथा आनंद के लिए साइकिलों की मांग बढ़ी है। विशेषरूप से प्रीमियम और बच्चों के खंड में मांग में बढ़ोतरी हुई है। जैन ने कहा कि इन खंड की अच्छी मांग की वजह से बीते वित्त वर्ष में साइकिलों की कुल बिक्री में गिरावट सिर्फ पांच प्रतिशत रही।