इंफोसिस के CEO ने AI से छंटनी की खबरों को खारिज किया है। कंपनी कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाएगी और 20,000 फ्रेशर्स की भर्ती करेगी। उनके अनुसार, AI काम का दायरा बढ़ाएगा, नौकरियां खत्म नहीं करेगा।

बेंगलुरु: एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से आईटी सेक्टर में नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं भारत की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। इंफोसिस के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर सलील पारेख ने साफ कर दिया है कि कंपनी AI की वजह से किसी भी तरह की छंटनी (Layoffs) नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कंपनी AI की इस लहर में आगे बढ़ने के लिए अपने कर्मचारियों को नई स्किल्स सिखाएगी (Reskilling) और नई भर्तियां भी जारी रखेगी।

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छंटनी पर ब्रेक, भर्तियों को हरी झंडी

मनी कंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में सलील पारेख ने कहा, "हमने पिछले एक साल में कोई छंटनी नहीं की है और आगे भी ऐसी कोई योजना नहीं है।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई दूसरी आईटी कंपनियां ऑटोमेशन का हवाला देकर कर्मचारियों को निकाल रही हैं। बेंगलुरु की यह कंपनी इस साल भी कैंपस रिक्रूटमेंट के जरिए करीब 20,000 फ्रेशर्स को नौकरी पर रखने की तैयारी में है। पिछले साल भी कंपनी ने इतनी ही भर्तियां की थीं।

'AI नौकरी छीनेगा नहीं, काम का दायरा बढ़ाएगा'

पारेख का मानना है कि AI काम करने का तरीका बदल सकता है, लेकिन नौकरियां खत्म नहीं करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि AI टेक्नोलॉजी काम का दायरा बढ़ाएगी, उसे कम नहीं करेगी। हो सकता है कि एंट्री-लेवल की नौकरियों का स्वरूप बदल जाए, लेकिन टैलेंट की मांग हमेशा बनी रहेगी।

इंफोसिस अपने इंजीनियरों को AI टूल्स के साथ और उनके बिना भी काम करने की ट्रेनिंग दे रही है। इससे वे AI से तैयार हुए कोड का मूल्यांकन करने में और ज्यादा सक्षम हो सकेंगे।

दूसरी कंपनियों में छंटनी की गर्मी

एक तरफ जहां इंफोसिस नौकरी बचाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी आईटी कंपनियों में हालात अलग हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, TCS जुलाई 2025 तक करीब 12,500 कर्मचारियों की छंटनी कर सकती है। इसके अलावा HCLTech, Oracle और हाल ही में Cognizant जैसी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या में कटौती या फेरबदल कर रही हैं।

AI बनेगा ग्रोथ का इंजन

फिलहाल, इंफोसिस की कुल कमाई में AI टेक्नोलॉजी का हिस्सा 5.5% है। कंपनी का मानना है कि आने वाले दिनों में यह ग्रोथ का सबसे बड़ा जरिया बनेगा। इस बदलाव में तेजी लाने के लिए इंफोसिस ने OpenAI और Anthropic जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की है। साथ ही, कंपनी ने 'Topaz Fabric' जैसा अपना खुद का प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है।