असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन फॉर्म के अनुसार अलग-अलग होगी। जानिए ITR-1, ITR-2, ITR-3, ITR-4 की नई तारीखें और बड़े बदलाव।

अगर आप हर साल जुलाई में बिना सोचे-समझे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर देते हैं, तो इस बार थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27, जिसमें वित्त वर्ष (FY) 2025-26 की आय शामिल है, के लिए सरकार ने ITR फाइलिंग की समय-सीमा में बड़ा बदलाव किया है। अब सभी टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई आखिरी तारीख नहीं होगी। आपकी ITR फाइल करने की डेडलाइन इस बात पर निर्भर करेगी कि आप कौन-सा ITR फॉर्म भरते हैं।

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ITR Filing Deadline 2026: किस ITR फॉर्म की डेडलाइन कब?

बजट 2026 में ITR फाइलिंग के नियमों में बदलाव किया गया है। पहले ज्यादातर टैक्सपेयर्स के लिए 31 जुलाई की एक ही अंतिम तारीख होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

ITR-1 और ITR-2 फाइल करने वालों की डेडलाइन

अगर आप सैलरी पाने वाले कर्मचारी, पेंशनभोगी या निवेशक हैं और ITR-1 या ITR-2 फाइल करते हैं, तो आपके लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 ही रहेगी। इसमें आमतौर पर वे लोग शामिल होते हैं जिनकी इनकम का सोर्स सैलरी, पेंशन, ब्याज, कैपिटल गेन, एक या दो मकानों से आय है।

ITR-3 और ITR-4 फाइल करने वालों को एक महीने की राहत

जिन लोगों की आय बिजनेस या प्रोफेशन से होती है और जिनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, उन्हें अब ज्यादा समय मिलेगा। ऐसे टैक्सपेयर्स, जो ITR-3 या ITR-4 फाइल करते हैं, अब 31 अगस्त 2026 तक अपना रिटर्न जमा कर सकेंगे। इस फैसले से जिन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा उनमें फ्रीलांसर, कंसल्टेंट, डॉक्टर, वकील, छोटे कारोबारी, पार्टनरशिप फर्म के पार्टनर प्रिजम्पटिव टैक्सेशन स्कीम के तहत आने वाले टैक्सपेयर्स शामिल हैं। अतिरिक्त एक महीने का समय मिलने से उन्हें बुककीपिंग, खातों का मिलान (Reconciliation) और सही तरीके से रिटर्न तैयार करने में सुविधा होगी।

टैक्स ऑडिट और ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों की डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं

जिन मामलों में टैक्स ऑडिट अनिवार्य है, उनके लिए समय-सीमा पहले जैसी ही रहेगी।

  • टैक्स ऑडिट वाले मामलों की ITR डेडलाइन: 31 अक्टूबर 2026
  • ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख: 30 सितंबर 2026
  • वहीं, जिन मामलों में Transfer Pricing लागू होती है, उनके लिए ITR फाइल करने की अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 ही रहेगी।

Revised ITR दाखिल करने के लिए अब मिलेगा ज्यादा समय

सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी है। पहले टैक्सपेयर्स को 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करना होता था। अब AY 2026-27 से इसे बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है, जो असेसमेंट ईयर का अंतिम दिन भी है। इसका मतलब है कि अगर रिटर्न जमा करने के बाद आपको कोई गलती दिखाई देती है, तो उसे सुधारने के लिए पहले से ज्यादा समय मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, सेक्शन 80C का कोई क्लेम छूट गया हो, AIS और रिटर्न में अंतर हो, किसी आय या जानकारी की रिपोर्टिंग में गलती रह गई हो तो अब आप आराम से उसे संशोधित कर सकेंगे।

लेट ITR फाइल करने पर क्या होगा नुकसान?

अगर आप तय समय तक ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो सिर्फ लेट फीस ही नहीं, बल्कि कई दूसरे नुकसान भी हो सकते हैं। बिलेटेड (Belated) रिटर्न 31 दिसंबर 2026 तक फाइल किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए..

  • सेक्शन 234F के तहत 5,000 रुपये तक की लेट फीस देनी होगी।
  • यदि कुल आय 5 लाख रुपये से कम है, तो लेट फीस 1,000 रुपये होगी।
  • बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ेगा।

लेट रिटर्न भरने पर ये अधिकार भी छिन सकते हैं

  • समय पर ITR दाखिल न करने का असर केवल जुर्माने तक सीमित नहीं रहता। देर से रिटर्न भरने पर आपके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने का विकल्प खत्म हो सकता है।
  • आपको डिफॉल्ट नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में माना जा सकता है।
  • कुछ प्रकार के घाटे (Losses) को अगले वर्षों में कैरी फॉरवर्ड करने का अधिकार भी समाप्त हो सकता है। इसलिए समय पर ITR दाखिल करना काफी महत्वपूर्ण है।

AY 2026-27 क्यों है खास?

AY 2026-27 एक और वजह से महत्वपूर्ण है। यह Income Tax Act, 1961 के तहत ITR फाइल करने का आखिरी सीजन होगा। हालांकि Income Tax Act, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुका है, लेकिन इस साल दाखिल किए जाने वाले रिटर्न अभी भी पुराने कानून के तहत ही फाइल किए जाएंगे। अगले वर्ष से नए कानून के अनुसार ITR दाखिल होंगे।