लोन जल्दी चुकाने से ब्याज बचता है, पर बैंक प्रीपेमेंट पेनल्टी ले सकते हैं। फ्लोटिंग रेट लोन पर पेनल्टी नहीं है, पर फिक्स्ड रेट पर हो सकती है। फैसले से पहले ब्याज बचत और पेनल्टी की तुलना करना ज़रूरी है।
घर खरीदने, गाड़ी खरीदने, ऊंची पढ़ाई के लिए या फिर किसी अचानक आई आर्थिक जरूरत के लिए हममें से कई लोग लोन का सहारा लेते हैं। लेकिन कभी-कभी हमारी माली हालत उम्मीद से जल्दी सुधर जाती है और हम लोन का एक बड़ा हिस्सा चुकाकर कर्ज से जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हैं। लोन को तय समय से पहले चुकाने से कुल ब्याज का बोझ कम होता है और कर्ज से भी जल्दी मुक्ति मिल जाती है। लेकिन हाथ में आए एक्स्ट्रा पैसों को लेकर बैंक भागने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना चाहिए। देर से पेमेंट करने पर पेनल्टी लगती है, ये तो सब जानते हैं, लेकिन कुछ फाइनेंशियल संस्थान लोन जल्दी चुकाने पर भी फीस वसूलते हैं।

प्रीपेमेंट पेनल्टी क्या है?
रिजर्व बैंक ने बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) को साफ निर्देश दिया है कि वे फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट वाले लोन पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं ले सकते। यह नियम सभी तरह के लोन पर लागू होता है, चाहे वो किसी भी मकसद से लिया गया हो। हालांकि, फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट वाले लोन पर बैंक अब भी प्रीपेमेंट पेनल्टी लगा सकते हैं।
जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह वो जुर्माना है जो बैंक तब वसूलते हैं जब आप तय समय से पहले अपना लोन चुका देते हैं। अगर आपके लोन एग्रीमेंट में प्रीपेमेंट का क्लॉज है, तो आपको यह पेनल्टी देनी होगी। आप सोच रहे होंगे कि जब बैंक को उनका पैसा जल्दी वापस मिल रहा है तो वे जुर्माना क्यों लगाते हैं? दरअसल, बैंकों की कमाई का मुख्य जरिया लोन पर मिलने वाला ब्याज होता है। जब आप लोन जल्दी चुका देते हैं, तो बैंक को भविष्य में मिलने वाला ब्याज नहीं मिल पाता। इसी नुकसान की भरपाई के लिए कुछ बैंक प्रीपेमेंट चार्ज लगाते हैं।
यह चार्ज हर बैंक में अलग-अलग हो सकता है और यह जरूरी नहीं कि हर लोन पर लगे। यह पूरी तरह से आपके लोन एग्रीमेंट की शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए, लोन के कागजों पर साइन करने से पहले उसमें छोटे अक्षरों में लिखी शर्तों को भी ध्यान से पढ़ें।
जल्दी चुकाना फायदेमंद है या नहीं, यह कैसे जानें?
अगर आपका बैंक कोई प्रीपेमेंट फीस नहीं ले रहा है, तो लोन जल्दी चुकाकर आप एक बड़ी रकम बचा सकते हैं। अगर पेनल्टी है भी, तो भी ब्याज में होने वाली बचत और लोन की बची हुई अवधि को देखते हुए, जल्दी पेमेंट करना ही फायदेमंद हो सकता है।
इसके लिए सबसे पहले यह हिसाब लगाएं कि लोन जल्दी चुकाने से आप ब्याज के रूप में कितनी रकम बचाएंगे। यह वो रकम है जो आपको लोन की बची हुई अवधि में चुकानी पड़ती। इस बचत में से प्रीपेमेंट पेनल्टी और दूसरे एक्स्ट्रा चार्ज घटा दें। यह भी देखें कि पेनल्टी एक फिक्स्ड अमाउंट है या बकाया लोन का कुछ प्रतिशत। इन सब को घटाने के बाद जो रकम बचती है, वही आपकी असली बचत है। अगर यह वैल्यू माइनस में है, तो इसका मतलब है कि बचत से ज्यादा खर्च तो आपका पेनल्टी में ही हो जाएगा।
फायदे
ब्याज कम होने से ज्यादा पैसे बचते हैं। कर्ज जल्दी खत्म होने से क्रेडिट स्कोर बेहतर होता है। हाथ में आए एक्स्ट्रा पैसों को आप कहीं और निवेश कर सकते हैं या अपनी जरूरतों पर खर्च कर सकते हैं। कम ब्याज दर पर नया लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। आपको मेंटेनेंस या प्रोसेसिंग जैसे चार्ज नहीं देने पड़ते।
नुकसान
बिजनेस लोन पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है। लोन जल्दी चुकाने पर यह फायदा मिलना बंद हो सकता है। प्रीपेमेंट पेनल्टी कभी-कभी इतनी ज्यादा होती है कि जल्दी पेमेंट से होने वाली आपकी बचत काफी कम हो सकती है।
