25 जुलाई को डॉलर के मुकाबले रुपया अपने अब तक के लो लेवल 83.72 पर पहुंच गया। अगर डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी आगे भी इसी तरह बनी रही तो इसका असर देश के आयात बिल पर पड़ेगा और ये काफी महंगा हो जाएगा।

Dollar vs Rupee Update: बजट के बाद से ही विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिसका असर पिछले तीन दिन से शेयर बाजार में देखने को मिल रहा है। FII की विकवाली का असर करेंसी मार्केट पर भी साफ दिख रहा है। यही वजह है कि 25 जुलाई को डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने अब तक के लो लेवल पर पहुंच गया।

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डॉलर के मुकाबले 83.72 रुपए के लो लेवल पर पहुंचा रुपया

25 जुलाई को मुद्रा बाजार में एक डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने ऑलटाइम लो 83.72 रुपये पर क्लोज हुआ। डॉलर की बढ़ती मांग के अलावा भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते रुपए में कमजोरी बनी हुई है। इसके पहले रुपया 83.71 के लेवल पर बंद हुआ था।

Budget में इन 2 फैसलों से बिगड़ा शेयर बाजार का मूड

23 जुलाई को पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शार्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में इजाफे का ऐलान कर दिया। लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत जबकि शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स को 15 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया है। इसके बाद से ही शेयर मार्केट का सेंटिमेंट बिगड़ गया है। पिछले तीन दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बड़ी मात्रा में शेयरों की बिकवाली की है। वहीं, बजट के एक दिन पहले FII ने 2.20 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयरों की खरीदारी की थी।

कमजोर हुआ रुपया तो भारत को क्या नुकसान?

बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपए की कमजोरी बनी रही तो इसका असर आयात बिल पर पड़ेगा और ये काफी महंगा हो जाएगा। भारत अपनी कुल खपत का 80 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से मंगाता है। ऐसे में रुपए की कमजोरी के चलते उसे पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके अलावा भारत खाद्य तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम भी बाहर से आयात करता है। रुपए में कमजोरी के चलते इन्हें खरीदना भी महंगा पड़ेगा।

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