देश में जल्द ही नए लेबर कोड लागू हो सकते हैं। इसके तहत, आपकी कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा 'बेसिक सैलरी' होना चाहिए। इससे आपका PF और ग्रेच्युटी तो बढ़ेगा, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो जाएगी।
नई दिल्ली: देश में नए लेबर कोड को लागू करने की तैयारी चल रही है। इस नए नियम के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी यानी CTC का कम से-कम 50% हिस्सा 'बेसिक सैलरी' (Wages/Basic Pay) होना चाहिए। लेकिन, कंपनियां सीधे तौर पर बेसिक सैलरी 50% तक बढ़ाने के मूड में नहीं हैं। वे सैलरी के दूसरे हिस्सों में फेरबदल (Restructuring) कर सकती हैं। इससे आपकी CTC तो उतनी ही रहेगी, लेकिन महीने में हाथ आने वाली सैलरी घट जाएगी।
सैलरी की नई परिभाषा क्या है?
नए लेबर कोड के अनुसार, अगर HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस, ओवरटाइम जैसे भत्तों को छोड़कर बाकी बची रकम CTC के 50% से ज्यादा है, तो उस अतिरिक्त रकम को 'बेसिक सैलरी' में जोड़ दिया जाएगा। इससे आपका प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी (Gratuity) का कैलकुलेशन बढ़ जाएगा।
क्लियरटैक्स की टैक्स एक्सपर्ट सीए चांदनी आनंदन कहती हैं, "यह नियम बेसिक सैलरी को 50% तक बढ़ाने के लिए मजबूर नहीं करता, बल्कि सैलरी की परिभाषा बदलता है। अगर बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता कम है, तो कंपनियां दूसरे भत्तों को री-क्लासिफाई करके इसकी भरपाई कर सकती हैं।"
हाथ में आने वाली सैलरी क्यों घटेगी?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी कर्मचारी की सालाना CTC 15 लाख रुपये है। अभी उसकी बेसिक सैलरी 4.5 लाख हो सकती है। नए नियम के बाद PF और ग्रेच्युटी का हिस्सा बढ़ने से उसकी सालाना 'टेक-होम' सैलरी में करीब 52,000 रुपये की कमी आ सकती है।
'टैक्सस्पैनर' के सीईओ सुधीर कौशिक ने बताया, "कंपनियां सीधे बेसिक सैलरी बढ़ाने के बजाय, पर्दे के पीछे सैलरी के कंपोनेंट्स को एडजस्ट करेंगी। इससे रिटायरमेंट की बचत तो बढ़ेगी, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाला कैश कम हो जाएगा।"
बेसिक सैलरी बढ़ाने में क्या दिक्कतें हैं?
कंपनियां सीधे बेसिक सैलरी को 50% तक बढ़ाने से इसलिए हिचक रही हैं क्योंकि इससे कंपनी को भी कर्मचारी के PF, ग्रेच्युटी और NPS में ज्यादा पैसा जमा करना होगा। यह कंपनी के लिए एक बोझ होगा, वहीं कर्मचारी की मासिक सैलरी भी काफी घट जाएगी। HRA जैसे भत्ते बेसिक सैलरी से जुड़े होते हैं। अगर बेसिक सैलरी बहुत कम हो तो HRA का फायदा भी नहीं मिलता। इसलिए कंपनियां एक संतुलित रास्ता अपनाएंगी।
टैक्स सिस्टम पर क्या असर होगा?
पुरानी टैक्स व्यवस्था: इसमें कर्मचारी PF कंट्रीब्यूशन पर टैक्स छूट ले सकते हैं। लेकिन यह छूट सैलरी में हुई कटौती की भरपाई के लिए काफी नहीं होगी।
नई टैक्स व्यवस्था: इसमें टैक्स छूट कम हैं, लेकिन 75,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है, जिससे सैलरी में कटौती का बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है।
कर्मचारियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
कर्मचारियों को सिर्फ 'CTC' देखकर नौकरी नहीं लेनी चाहिए। इसके बजाय, इन बातों पर गौर करें:
- आपका PF और ग्रेच्युटी का हिस्सा कितना बढ़ रहा है?
- भत्ते और फिक्स्ड सैलरी का अनुपात क्या है?
- सारी कटौतियों के बाद हाथ में नेट सैलरी (Net Take-home) कितनी आएगी?
चांदनी आनंदन सलाह देती हैं, "लंबे समय में सोशल सिक्योरिटी के लिहाज से यह एक अच्छा कदम है। आपके रिटायरमेंट के लिए ज्यादा पैसा बचेगा। हाथ में आने वाली सैलरी में कमी को 'कटौती' की तरह देखने के बजाय इसे एक 'निवेश' समझना चाहिए।"
