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omicron से बढ़ सकता है लोन restructuring का जोखिम, ICRA ratings ने जताई आशंका

ICRA ratings  ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि बैंकों द्वारा दिए गए कर्जों के अलावा कर्जदाताओं को प्रॉफिट और Loan Solution के मुद्दे पर भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से बढ़ते मामलों को जिम्मेदार माना जा सकता है। 

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Bhopal, First Published Jan 6, 2022, 6:35 PM IST
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बिजनेस डेस्क। omicron ( कोविड-19 महामारी की तीसरी लहर) के आने से एक बार फिर बाजार में आर्थिक संकट गहराने की स्थिति बन सकती है।  ICRA ( घरेलू रेटिंग एजेंसी) ने आशंका जताई है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर की वजह से वित्तीय संस्थाओं (बैंकों ) की asset गुणवत्ता खासकर restructured loans के लिए बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है। इक्रा रेटिंग्स ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि बैंकों द्वारा दिए गए कर्जों के अलावा कर्जदाताओं को प्रॉफिट और Loan Solution के मुद्दे पर भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के तेजी से बढ़ते मामलों को जिम्मेदार माना जा सकता है। 

बैंकों की बढ़ेगी मुसीबत 
 घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, मौजूदा हालातों में कर्जदारों की तरफ से debt restructuring के अनुरोध 0.15 से 0.20 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं। इक्रा के Financial Sector Rating उपाध्यक्ष अनिल गुप्ता (  Vice President Anil Gupta )ने कहा, "ओमीक्रोन वेरिएंट के संक्रमण बढ़ने के साथ तीसरी लहर की आशंका काफी बढ़ गई है। पिछली दो लहरों से बुरी तरह प्रभावित कर्जदाता संस्थानों के प्रदर्शन के लिए यह एक बड़ा जोखिम हो सकता है।"

दो विशेष पैकेज के ऐलान से मिली थी राहत
उन्होंने कहा कि बैंकों ने कोविड महामारी की पिछली दो लहरों में लोन के पुनर्भुगतान को 12 महीने तक निलंबित कर दिया था। वहीं इस साल कर्ज पुनर्गठन की मांग 15-20 आधार अंक (0.15 से 0.20 प्रतिशत) तक बढ़ सकती है। पिछली दो लहरों में reserve Bank of India ने दो राहत पैकेज का ऐलान कर कर्जदाताओं एवं कर्जदारों दोनों को राहत दी थी। वहीं इस समय अनिश्चय की स्थिति है। 

लघु-मध्यम उद्योग पर पड़ेगा असर
इक्रा की रिपोर्ट के मुताबिक  दूसरी लहर के दौरान रिटेल एवं MSME (micro, small and medium enterprises) को कर्ज पुनर्गठन पहली लहर के दौरान पुनर्गठित कर्जों की तीन गुनी रही। पुनर्गठन की वजह से खातों की स्थिति भी सुधर गई। वहीं यदि हालात बिगड़ते हैं तो बैंकों के साथ छोटे कारोबारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। 


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