Petrol Diesel price :  88 डॉलर से बढ़ते हुए क्रूड 139 डॉलर तक पहुंच गया था। यह 14 साल पुराने 2008 के स्तर पर था। लेकिन क्रूड की यह ऊंचाई महज एक दिन ही रही। इसके बाद से क्रूड के दाम नीचे गिर र हैं। 10 मार्च को यह 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर तक आ सकती हैं, ऐसे में पेट्रोल और डीजल 2 से 3 रुपए तक सस्ता हो सकता है।  

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव (Five State elections 2022) हो चुके हैं। 7 मार्च को आखिरी चरण के बाद से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने (Petrol & Diesel Price hike)की बातें कही जा रही हैं। लोग फुल टैंक करवा रहे हैं, ताकि कम से कम एक बार तो महंगाई की मार से बच सकें। लेकिन फिलहाल जो स्थिति दिख रही है, उससे लगता है कि पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ेंगे नहीं, बल्कि यह कम हो सकते हैं।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

रूस- यूक्रेन युद्ध के कारण चढ़ा क्रूड
जी हां, बिल्कुल सही है। दरअसल कच्चे तेल की कीमतें रूस और यूक्रेन युद्ध के चलते तेजी से बढ़ी थीं। 88 डॉलर से बढ़ते हुए क्रूड 139 डॉलर तक पहुंच गया था। यह 14 साल पुराने 2008 के स्तर पर था। लेकिन क्रूड की यह ऊंचाई महज एक दिन ही रही। इसके बाद से क्रूड के दाम नीचे गिर र हैं। यह 109 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर तक आ सकती हैं, ऐसे में पेट्रोल और डीजल 2 से 3 रुपए तक सस्ता हो सकता है। 

श्रीलंकर में पेट्रोल 254 रुपए और डीजल 176 रुपए लीटर 
एक पेट्रोलियम कंपनी से जुड़े अधिकारी का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का मसला हल हो जाए तो कच्चे तेल की कीमतें और कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की जो कीमतें हैं, वह बहुत देश बर्दाश्त नहीं कर सकते। श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल और डीजल में बेहहाशा व़द्धि हुई है। पेट्रोल में 77 और डीजल 55 रुपए बढ़ गया है। ऐसे में वहां पेट्रोल 254 रुपए और डीजल 176 रुपए लीटर बिक रहा है। 

तेल की कीमतें सरकार पर ही निर्भर
देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कंपनियां तय करती है। लेकिन यह महज देखने की बात है। क्रूड के रेट बढ़ने का असर पेट्रोलियम पदार्थों पर तभी पड़ता है, जब सरकार हरी झंडी देती है। उदाहरण के लिए देखें तो दिसंबर 2021 में कच्चे तेल का दाम 68.87 डॉलर था। उस वक्त दिल्ली में पेट्रोल का दाम 95.41 रुपए प्रति लीटर था। 7 मार्च 2022 को कच्चे तेल का दाम 139.13 डॉलर पहुंच गया। लेकिन पेट्रोल के दाम 95.41 पर ही टिके रहे। 

चुनावों में हर बार थमीं कीमतें
- 2022 में फरवरी - मार्च में यूपी, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और पंजाब के चुनाव हुए। इस दौरान 102 दिनों से अधिक समय से पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं। 
- 2020 में 28 अक्टूबर से 7 नवंबर के दौरान बिहार विधानसभा के चुनाव हुए और 10 नवंबर को नतीजे आए। इस दौरान 2 सितंबर से 19 नवंबर के बीच पेट्रोल-डीजल के स्थिर रहे।
- दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भी 2020 की शुरुआत में 12 जनवरी से 23 फरवरी तक पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़े थे।
- 2019 में अप्रैल-मई के दौरान हुए लोकसभा चुनावों में भी तेल कंपनियों ने दाम नहीं बढ़ाए थे। मतदान का अंतिम चरण संपन्न होते ही पेट्रोल एवं डीजल के भाव फिर से बढ़ने लगे थे।
- 2017 में भी पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान भी कीमतें नहीं बढ़ाई थीं। पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मणिपुर में जारी चुनाव प्रक्रिया के दौरान 16 जनवरी-1 अप्रैल, 2017 तक तेल कीमतें स्थिर बनी रही थीं।
- दिसंबर, 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भी करीब दो सप्ताह तक पेट्रोल एवं डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए थे।

यह भी पढ़ें Petrol Diesel Price Today, 13 March 2022 अब घर पर ही किए होली सेलीब्रेट, कंपनियों ने जारी किए फ्यूल प्राइस