डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट रोकने हेतु RBI बड़े कदम उठा सकता है। इनमें ब्याज दरें बढ़ाना, करेंसी स्वैप और NRI से $5000 करोड़ जुटाना शामिल है। हाल ही में एक डॉलर की कीमत 97 रुपये के करीब पहुंच गई थी।
नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। इसे गिरने से रोकने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI ब्याज दरें बढ़ाने, करेंसी स्वैप करने और विदेशी निवेशकों के साथ-साथ प्रवासी भारतीयों (NRIs) से ज़्यादा से ज़्यादा डॉलर जुटाने जैसे बड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इस हफ़्ते एक डॉलर की कीमत 97 रुपये के करीब पहुंच गई थी। इस इमरजेंसी जैसे हालात में RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अगुवाई में बड़े अधिकारी लगातार बैठकें कर रहे हैं और हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि RBI का पहला मकसद रुपये की गिरावट को किसी भी हाल में रोकना है और इसके लिए वो कोई भी कदम उठाने को तैयार है।
जल्द बढ़ सकती हैं ब्याज दरें
रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें बढ़ाना एक बड़ा विकल्प माना जा रहा है। अभी रेपो रेट 5.25% है। RBI की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 3 से 5 जून के बीच होनी है। लेकिन हो सकता है कि RBI बैठक का इंतज़ार न करे और मई 2022 की तरह अचानक ही ब्याज दरें बढ़ा दे। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए आने वाले महीनों में ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
अभी भारत और अमेरिका की ब्याज दरों में अंतर पिछले एक दशक में सबसे कम है। अगर भारत में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो विदेशी निवेशक यहां पैसा लगाने के लिए आकर्षित होंगे। इस साल विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से जमकर पैसा निकाल रहे हैं। पिछले साल उन्होंने रिकॉर्ड 1900 करोड़ डॉलर निकाले थे, लेकिन इस साल यह आंकड़ा पहले ही पार हो चुका है।
प्रवासी भारतीयों पर नज़र, टारगेट 5000 करोड़ डॉलर
विदेश से डॉलर जुटाने के लिए RBI प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए खास बैंक डिपॉज़िट स्कीमें लाने पर भी विचार कर रहा है। भारत ने 2013 में भी इसी तरह की स्कीमें लॉन्च की थीं, तब करीब 3000 करोड़ डॉलर जुटाए गए थे। RBI को उम्मीद है कि इस बार नई स्कीमों से कम से कम 5000 करोड़ डॉलर जुटाए जा सकते हैं। इसके अलावा, सरकार के फैसले के आधार पर विदेशी बाज़ार में सॉवरेन डॉलर बॉन्ड जारी करने की भी योजना है।
'अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत'
जानकारों का मानना है कि रुपया उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से गिर रहा है, लेकिन भारत की आर्थिक बुनियाद और बैंकिंग सिस्टम काफी मज़बूत हैं। यह मज़बूती एक्सचेंज रेट में नज़र नहीं आ रही है। इस बीच, बुधवार को RBI ने बैंकिंग सिस्टम में कैश बढ़ाने और डॉलर रिज़र्व को मज़बूत करने के लिए 500 करोड़ डॉलर की करेंसी स्वैप नीलामी का ऐलान किया था। आने वाले दिनों में ऐसी और भी नीलामियां हो सकती हैं। RBI ने इन खबरों पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
