India Retail Inflation September 2026: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने के सामान की बढ़ती कीमतों के कारण सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर 5.47% तक पहुंच सकती है। अगस्त में यह 4.82% थी। सब्जियों के दाम बढ़ने से फूड इन्फ्लेशन 7.35% तक जाने का अनुमान है।

September CPI Inflation: यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ने के कारण सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर (रिटेल इन्फ्लेशन) 5.47 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अगस्त में यह आंकड़ा 4.82 प्रतिशत था।

फूड इन्फ्लेशन ने बढ़ाई टेंशन

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि सितंबर में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 7.35 प्रतिशत हो जाएगा, जो अगस्त में 5.66 प्रतिशत था। इसमें सबसे बड़ा रोल सब्जियों की बढ़ती कीमतों का है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस उछाल से हेडलाइन इन्फ्लेशन "दिसंबर '24 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगी और यह RBI के कंफर्ट लेवल से काफी ऊपर है।"

सब्जियों और प्याज के दाम में आग

सब्जियों की महंगाई दर अगस्त के 0.99 प्रतिशत से उछलकर सितंबर में 9.34 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के डेटा का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि इस महीने प्याज की कीमतों में करीब 34 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिसने सब्जियों की महंगाई बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया।

खाने-पीने के बाकी सामान भी हुए महंगे

महंगाई की मार खाने-पीने की दूसरी चीजों पर भी पड़ रही है। UBI को उम्मीद है कि सितंबर में अनाज की महंगाई दर अगस्त के 2.82 प्रतिशत से बढ़कर 3.75 प्रतिशत हो जाएगी। वहीं, दालों की महंगाई दर 3.06 प्रतिशत से बढ़कर 4.19 प्रतिशत तक जा सकती है। इसके अलावा चीनी, खाने वाले तेल और दूध की कीमतें भी लगातार ऊपर बनी हुई हैं।

महंगाई बढ़ने की असली वजहें

रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने के पीछे सप्लाई चेन में लंबे समय से चल रही रुकावटों, महंगी एनर्जी, ग्लोबल मार्केट में चिप की बढ़ती कीमतों और संभावित सुपर अल नीनो (Super El Niño) के असर को जिम्मेदार बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, "फूड इन्फ्लेशन बहुत तेजी से बढ़ा है और यह जनवरी '26 के 2.12% से बढ़कर अगस्त '26 में 5.66% पर टिक गया है। सुपर अल-नीनो की घटना और युद्ध के कारण सप्लाई में आई रुकावटों ने इसे बढ़ाया है, जबकि पिछले साल का लो बेस भी इसमें खेल बिगाड़ रहा है।"

खराब मौसम और खेती पर असर

मौसम के हालात भी खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। जून-सितंबर 2026 सीजन में दक्षिण-पश्चिम मानसून लंबी अवधि के औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश के साथ खत्म हुआ। वहीं, जलाशयों (डैम) में पानी का स्तर 72 प्रतिशत रहा, जो एक साल पहले 92 प्रतिशत था। कुल खरीफ फसल की बुवाई पिछले साल के मुकाबले करीब 1 प्रतिशत कम रही, जिसमें धान की बुवाई में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई है।

कोर इन्फ्लेशन में भी इजाफा

कोर इन्फ्लेशन (जिसमें ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली चीजें शामिल नहीं होतीं) भी अगस्त के 4.44 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 4.48 प्रतिशत होने की उम्मीद है। यह दिखाता है कि महंगाई का असर सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं है।

UBI ने कहा कि कीमतों में यह चौतरफा बढ़ोतरी इस बात का इशारा है कि सप्लाई के झटके अब महंगाई के बड़े दायरे को प्रभावित कर रहे हैं। बैंक ने यह भी जोड़ा कि आने वाले महीनों में खाने-पीने और दूसरी चीजों की कीमतों का दबाव महंगाई के नजरिए से एक बड़ी चिंता बना रहेगा।