बढ़ते ईंधन के दाम Swiggy और Zomato पर खाना महंगा कर सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रति ऑर्डर लागत 44 पैसे तक बढ़ सकती है। इससे प्रभावित डिलीवरी पार्टनर्स भी विरोध कर रहे हैं और ज़्यादा पैसों की मांग कर रहे हैं।
अब ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना आपकी जेब पर थोड़ा और भारी पड़ सकता है। ईरान में तनाव के बाद कच्चे तेल के संकट और फिर ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण Swiggy और Zomato जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की दरें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। एक प्रमुख फाइनेंशियल रिसर्च फर्म Elara Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, Zomato की पेरेंट कंपनी बताई जाने वाली Eternal और Swiggy समेत कई फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए आने वाले दिनों में लागत बढ़ जाएगी।

एक ऑर्डर पर कितना बढ़ेगा खर्च?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण हाल ही में ईंधन की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे पेट्रोल और डीजल के दाम में लगभग 4% की बढ़ोतरी हुई है। Elara Capital का अनुमान है कि ईंधन की कीमतों में इस 4% की बढ़ोतरी से हर ऑर्डर पर लगभग 44 पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौजूदा हालात में अगर डिलीवरी पार्टनर्स ज़्यादा पैसे की मांग करते भी हैं, तो भी इससे कंपनियों के रेवेन्यू पर फिलहाल कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
अभी डिलीवरी पर कितना खर्च आता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के लिए एक ऑर्डर पर डिलीवरी का औसत खर्च इस तरह है:
- क्विक कॉमर्स ऑर्डर्स पर औसतन 35 से 50 रुपये।
- फूड डिलीवरी ऑर्डर्स पर औसतन 55 से 60 रुपये।
- Eternal के लिए कुल औसत खर्च लगभग 45 रुपये प्रति ऑर्डर है।
- Swiggy के लिए यह औसत करीब 55 रुपये प्रति ऑर्डर है।
एक डिलीवरी पर आने वाले कुल खर्च का लगभग 20% हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। इसका मतलब है कि अभी एक ऑर्डर पर करीब 9 से 10 रुपये सिर्फ ईंधन पर खर्च हो रहे हैं। यही वजह है कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से कंपनियों पर दबाव बन रहा है।
विरोध में उतरे डिलीवरी पार्टनर्स
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर डिलीवरी करने वाले वर्कर्स की कमाई पर पड़ने की आशंका है। 'गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन' ने पिछले हफ्ते ही मांग की थी कि ईंधन की बढ़ी कीमतों को देखते हुए प्रति किलोमीटर सर्विस रेट तुरंत बढ़ाया जाए। इसके लिए उन्होंने 5 घंटे तक ऐप-आधारित सेवाएं बंद रखकर अपना विरोध भी जताया था।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि देश में लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स हैं जो अपनी रोज़ी-रोटी के लिए बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं, और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का उन पर गंभीर असर पड़ेगा। यूनियन का कहना है कि अगर ईंधन और गाड़ी के रखरखाव के खर्च के हिसाब से उनकी कमाई नहीं बढ़ी, तो कई वर्कर्स यह काम छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे।
