वीज़ा बैन वाले देशों की लिस्ट में भारत का नाम नहीं है। अमेरिका में स्थायी निवास में मदद करने वाले 'ग्रीन कार्ड' समेत दूसरे वीज़ा के लिए अप्लाई करने वाले भारतीयों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा।
विदेशियों को इमिग्रेशन वीज़ा देने के मामले में अमेरिका ने बड़े प्रतिबंध लगाए हैं। 'अमेरिका फर्स्ट' पॉलिसी के तहत, पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत 75 देशों के लोगों के लिए वीज़ा अनिश्चित काल के लिए रोक दिया गया है। लेकिन, वीज़ा बैन वाले देशों की लिस्ट में भारत शामिल नहीं है। अमेरिका में स्थायी निवास में मदद करने वाले 'ग्रीन कार्ड' समेत दूसरे वीज़ा के लिए अप्लाई करने वाले भारतीयों पर इस फैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा।
यह नया नियम क्या है?
नया नियम 21 जनवरी से लागू होगा। जब तक अमेरिकी सरकार की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती, इन 75 देशों के लोगों को इमिग्रेशन वीज़ा नहीं दिया जाएगा। यह बैन उन देशों पर लगाया गया है, जहां धोखाधड़ी की आशंका ज़्यादा है और जिनके नागरिक अमेरिका आने के बाद वहां की सरकार पर आर्थिक बोझ बन सकते हैं। पहचान दस्तावेजों में गड़बड़ी और जानकारी शेयर करने में लापरवाही भी इन देशों के लिए एक बड़ी वजह बनी।
पड़ोसियों को बड़ा झटका, भारत 'सेफ'
जब पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी देश इस लिस्ट में शामिल हैं, तब भारत का इससे बाहर रहना एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। अमेरिका ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान, यमन और सोमालिया जैसे देशों की कैटेगरी में रखा है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि को बड़ा धक्का लगा है। पहले यह पाया गया था कि सोमालिया के लोगों ने अमेरिका में टैक्सपेयर्स के पैसे से मिलने वाले फायदों में बड़ी धोखाधड़ी की थी। अब अमेरिका ऐसे ही हाई-रिस्क वाले देशों को अलग रख रहा है।
भारत को इससे कैसे फायदा होगा?
इससे यह संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन की नजर में भारत एक 'भरोसेमंद पार्टनर' है। यह भारतीयों के लिए इन क्षेत्रों में फायदेमंद होगा:
- आईटी और हेल्थ सेक्टर: अमेरिका के हेल्थ और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नौकरी ढूंढ रहे एक्सपर्ट्स के लिए वीज़ा प्रक्रिया अब आसान हो जाएगी।
- हायर एजुकेशन: अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय छात्रों को इससे आत्मविश्वास मिलेगा।
- तकनीकी साझेदारी: दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और भी मजबूत होगा।
नए नियम और भी सख्त होंगे
जिन देशों पर बैन नहीं है, उनके आवेदकों के लिए भी अब चीजें उतनी आसान नहीं होंगी। कॉन्सुलर अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे आवेदकों की उम्र, स्वास्थ्य, अंग्रेजी भाषा की स्किल और आर्थिक स्थिति की कड़ी जांच करें। स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगट ने साफ किया कि किसी को भी अमेरिकी लोगों की उदारता का गलत फायदा उठाने नहीं दिया जाएगा। जिनके पास पहले से वीज़ा है, उन पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा। अगले मंगलवार से सिर्फ नए आवेदकों के अपॉइंटमेंट रोके जा रहे हैं।
