शेयर मार्केट खुलते ही सोमवार 23 फरवरी को IDFC First Bank के शेयर 20% तक ढह गए। हालांकि, बाद में हल्की रिकवरी दिखी। बाजार में धुआंधार तेजी के बावजूद आखिर इस प्राइवेट सेक्टर के बैंक में गिरावट की क्या वजह है, आइए जानते हैं। 

IDFC First Bank Stock Falling: प्राइवेट सेक्टर के IDFC First Bank के शेयरहोल्डर्स के लिए 23 फरवरी का दिन बेहद मनहूस रहा। 590 करोड़ रुपये के घोटाले की खबर सामने आते ही बैंक का स्टॉक शुरुआती कारोबार में करीब 20% तक टूट गया। बीएसई पर शेयर गिरकर 66.85 रुपये तक पहुंच गया। भारी बिकवाली के चलते बैंक का मार्केट कैप घटकर लगभग 61,000 करोड़ रुपये रह गया है।

IDFC First Bank का शेयर क्यों टूटा?

बैंक ने खुलासा किया है कि चंडीगढ़ की एक ब्रांच में हरियाणा सरकार के खातों से जुड़े 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई है। इसमें बैंक के कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों की संलिप्तता पाई गई है। IDFC First Bank के अनुसार, फिलहाल फ्रॉड की राशि 590 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि, अंतिम रकम एक रिकंसिलिएशन एक्सरसाइज के बाद फाइनल होगी, जिसमें आगे की जानकारी, क्लेम का वैलिडेशन और संभावित रिकवरी को ध्यान में रखा जाएगा।

फ्रॉड का खुलासा कैसे हुआ?

बैंक के मुताबिक, हरियाणा सरकार का एक विभाग IDFC First Bank के साथ बैंकिंग सेवाएं ले रहा था। किसी अनजान तारीख पर बैंक को अकाउंट बंद करने और बैलेंस को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध मिला। जब इस प्रक्रिया को शुरू किया गया, तो अकाउंट में मौजूद बैलेंस और बताई गई रकम के बीच बड़ा डिफरेंस पाया गया। इसके बाद जांच में हरियाणा सरकार से जुड़ी अन्य इकाइयों के अकाउंट्स में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई।

जांच में क्या सामने आया?

IDFC First Bank ने कहा है कि शुरुआती इंटरनल रिव्यू में यह मामला हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खास सरकारी-लिंक्ड अकाउंट्स तक सीमित पाया गया है। ये अकाउंट्स चंडीगढ़ की उसी ब्रांच के जरिए संचालित होते थे। बैंक का कहना है कि यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ ब्रांच के अन्य ग्राहकों तक नहीं फैली है। मामले की जांच पूरी होने तक बैंक ने 4 अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। बैंक ने कहा है कि उसने इस मामले की जानकारी बैंकिंग रेगुलेटर और पुलिस को दी है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।