बेंगलुरु के एक युवक ने कम सैलरी, भारी काम और तनाव के कारण कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी। सिर्फ 6% हाइक से निराश होकर, उन्होंने बिना बैकअप प्लान और लोन होने के बावजूद इस्तीफा दे दिया। उनकी यह कहानी वायरल हो गई है।
बेंगलुरु के एक लड़के ने बताया है कि उसने बिना कोई दूसरी नौकरी ढूंढे अपनी कॉर्पोरेट जॉब क्यों छोड़ दी। खराब सैलरी, काम के बेहिसाब बोझ और कॉर्पोरेट लाइफ के स्ट्रेस पर उसकी बातें इतनी सच्ची हैं कि इंटरनेट पर लोग खुद को उससे जोड़कर देख रहे हैं। 'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के एक वीडियो में प्रमोद पॉल ने बताया कि सालों के तनाव, लंबे वर्किंग आवर्स और नाम मात्र की सैलरी हाइक के बाद उन्हें लगा कि अब नौकरी छोड़ने का वक्त आ गया है। कुछ लोगों ने उनके फैसले की तारीफ की, तो कुछ ने बिना बैकअप प्लान के नौकरी छोड़ने पर सवाल उठाए।

वीडियो की शुरुआत में पॉल कहते हैं, "मेरे चेहरे पर चमक देख रहे हो? वो दिन आ गया है। मैं इस्तीफा दे रहा हूं। हाथ में कोई दूसरी नौकरी नहीं है, कोई बैकअप प्लान नहीं, कुछ भी नहीं।" उन्होंने बताया कि सालों से उनकी जिम्मेदारियां तो बढ़ती गईं, लेकिन सैलरी उस हिसाब से नहीं बढ़ी।
उनके मुताबिक, वो एक एनालिस्ट के पद पर थे, लेकिन काम उनसे सीनियर एनालिस्ट का लिया जा रहा था। उन्होंने कहा, "दिन-रात काम करके दिन और रात का फर्क ही मिट गया था। हालत ये थी कि मुझे काम सीनियर एनालिस्ट का दिया गया था, पद एनालिस्ट का था और सैलरी एक इंटर्न जितनी थी।"
पॉल ने अपने हालिया सैलरी इंक्रीमेंट के बारे में भी बात की, जिसने उन्हें सबसे ज़्यादा निराश किया। उन्होंने बताया, "इतना सारा स्ट्रेस और दुख, किसलिए? सिर्फ 6% हाइक के लिए? 6%! मतलब महीने के सिर्फ 2,600 रुपए।"
उन्होंने बताया कि तनाव इतना बढ़ गया कि उन्हें प्रोफेशनल मदद लेनी पड़ी। "इतनी एंग्जायटी के बाद, मैं एक साइकियाट्रिस्ट के पास गया। उनकी कंसल्टेशन फीस ही 2,000 रुपए थी। उन्होंने मुझे स्ट्रेस मैनेजमेंट ट्रीटमेंट लेने की सलाह दी। उसके हर सेशन का खर्च 3,000 रुपए था।" उन्होंने मज़ाक में कहा, "जब आपकी थेरेपी का एक सेशन आपकी सालाना सैलरी हाइक से महंगा पड़ने लगे, तो समझ जाइए कि आपका काम हो चुका है।"
'ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के मुताबिक, पॉल बेंगलुरु के पास कोलार में पले-बढ़े। उनकी मां हाउसवाइफ हैं और पिता एक पादरी। परिवार ने उनकी और उनके भाई की पढ़ाई के लिए लोन लिया था। ग्रेजुएशन के बाद, परिवार का कर्ज चुकाने में मदद के लिए उन्होंने 8 लाख रुपए का लोन लिया और एक फाइनेंशियल मैनेजर के तौर पर काम शुरू किया। इसके बाद, उन्होंने एक फाइनेंशियल फर्म में लगभग चार साल तक काम किया।
देखिए वायरल वीडियो
उन्होंने आगे कहा, "मैंने देखा कि यहां चाय बेचने वाले महीने के 2 लाख रुपए कमा रहे हैं, जबकि मैं मूंगफली के दानों जैसी सैलरी में फंसा हुआ था।" पॉल ने बताया कि उनका आखिरी वर्किंग डे 15 अगस्त होगा। उन्होंने यह भी माना कि उन पर अभी भी 3 लाख रुपए का एजुकेशन लोन बाकी है और उन्हें नहीं पता कि आगे क्या करना है।
