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BHU: बनारस हिन्दू विश्नविद्यालय को मिला पहला आईआईटियन vice chancellor, जानें कौन हैं प्रोफेसर सुधीर जैन

IIT गांधीनगर के निदेशक प्रो. सुधीर कुमार जैन बीएचयू के पहले कुलपति होंगे जो आईआईटियन हैं। वह आईआईटी गांधीनगर में निदेशक के पद पर लगातार तीसरी बार सेवा दे रहे थे। 

BHU professor sudhir kumar jain new vice chancellor of banaras hindu university pwt
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Varanasi, First Published Nov 16, 2021, 9:33 PM IST
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करियर डेस्क. 8 महीने के लंबे इंतजार के बाद बनारस हिन्दू विश्नविद्यालय (BHU) को नया कुलपति मिल गया है। प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन (Prof Sudhir Kumar Jain) को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) का नया कुलपति (vice chancellor) नियुक्त किया है। बीएचयू के प्रवक्ता राजेश सिंह ने कहा कि प्रोफेसर जैन विश्वविद्यालय (BHU) के 28वें कुलपति के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे। आइए जानते हैं कौन हैं प्रोफेसर सुधीर कुमार जैन।

IIT गांधीनगर के निदेशक प्रो. सुधीर कुमार जैन बीएचयू के पहले कुलपति होंगे जो आईआईटियन हैं। वह आईआईटी गांधीनगर में निदेशक के पद पर लगातार तीसरी बार सेवा दे रहे थे। इसके पूर्व आईटी बीएचयू (वर्तमान में आईआईटी बीएचयू) के निदेशक रहे। प्रोफेसर जैन ने 1979 में रुड़की विश्वविद्यालय से बीए किया और फिर 1980 और 1983 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पासाडेना से एमएस और पीएचडी पूरी की। 

प्रो जैन सूचना और साहित्य के प्रसार और भूकंप आपदाओं के खिलाफ क्षमता निर्माण के उद्देश्य से आईआईटी कानपुर में भूकंप इंजीनियरिंग के राष्ट्रीय सूचना केंद्र की अवधारणा और विकास किया। प्रोफेसर जैन ने देश में इंजीनियरिंग, वास्तुकला और पॉलिटेक्निक के कॉलेजों में भूकंप इंजीनियरिंग विकसित करने के उद्देश्य से काम किया है। आईआईटी गांधीनगर के डायरेक्टर बनने से पहले प्रोफेसर जैन आईआईटी कानपुर के साथ 1995 से 2008 के मध्य कई बार काम कर चुके हैं। 

बीएचयू के प्रवक्ता राजेश सिंह का कहना है कि प्रोफेसर जैन यूनिवर्सिटी के 28वें कुलपति होंगे। इस साल 28 मार्च को प्रो. राकेश भटनागर का कार्यकाल खत्म हो गया था। उसके बाद से  प्रोफेसर वी के शुक्ला कार्यवाहक कुलपति के रूप में संभाल रहे थे। 

कब हुई थी BHU की स्थापना?
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी में स्थित एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है।  इसकी स्थपना महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने 4 फरवरी 1916 में की गई थी। इस विश्वविद्यालय के दो कैंपस हैं। मुख्य परिसर (1300 एकड़) का है जो वाराणसी में स्थित है। विश्वविद्यालय का दूसरा परिसर मिर्जापुर जनपद में बरकछा नामक जगह (2700 एकड़) पर स्थित है। 75 छात्रावासों के साथ यह एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है।

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