NEET-UG पेपर लीक मामले में CBI की जांच का दायरा बढ़ रहा है। NTA द्वारा नियुक्त 3 टीचरों समेत 11 लोग गिरफ्तार हुए हैं। जांच में करोड़ों के लेनदेन और लीक पेपर से स्पेशल क्लास चलाने का खुलासा हुआ है।

नई दिल्ली: मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET-UG के पेपर लीक मामले में CBI की जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की तरफ से नियुक्त किए गए तीन टीचरों की गिरफ्तारी के बाद अब दो और टीचर CBI के रडार पर हैं। CBI के मुताबिक, पेपर लीक के इस खेल में करोड़ों का लेनदेन हुआ है। CBI ने पाया है कि लीक हुए क्वेश्चन पेपर का इस्तेमाल कर गिरफ्तार टीचरों ने स्पेशल क्लास चलाई थीं। इन क्लास में एडमिशन के लिए छात्रों से मोटी रकम वसूली गई थी।

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

जांच एजेंसी ने हाल ही में इस मामले में तीसरे टीचर को गिरफ्तार किया है। पुणे की रहने वाली 58 साल की मनीषा संजय हवलदार को CBI ने पकड़ा है। वह NTA की तरफ से नियुक्त की गई थीं और उन्होंने NEET-UG के फिजिक्स के पेपर को तैयार करने में मदद की थी। CBI का कहना है कि मनीषा ने फिजिक्स के सवाल एक और आरोपी टीचर मनीषा मंधारे को दिए थे, जिसे 16 मई को गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि लीक हुए सवाल और असली पेपर के सवाल एक ही थे।

गिरफ्तार मनीषा संजय हवलदार पुणे के एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं और अगले महीने 30 जुलाई को रिटायर होने वाली थीं। इससे पहले, पुणे के ही एक कॉलेज में बायोलॉजी की टीचर मनीषा मंधारे को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने बॉटनी और जूलॉजी के सवाल हैंडल किए थे। इस केस में गिरफ्तार होने वाले पहले टीचर लातूर के पी.वी. कुलकर्णी थे। वह एक कॉलेज में केमिस्ट्री के लेक्चरर थे और रिटायरमेंट के बाद NTA से जुड़े थे। उन्होंने ही सवालों का मराठी में अनुवाद किया था।

इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच टीम ने दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे, लातूर और अहिल्यानगर जैसी जगहों पर छापेमारी की है। इन छापों में कई अहम दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए हैं। इन सभी की फॉरेंसिक जांच चल रही है।