IIT ग्रेजुएट की एक वायरल पोस्ट 25 लाख के पैकेज के बावजूद कम इन-हैंड सैलरी मिलने की हकीकत बताती है। यह टैक्स, PF जैसी कटौतियों के कारण CTC और वास्तविक आय के बीच के बड़े अंतर को उजागर करता है।

IIT से पढ़े एक लड़के को जब 25 लाख सालाना (LPA) के पैकेज वाली नौकरी मिली, तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। लेकिन जब पहली सैलरी अकाउंट में आई, तो उसके होश उड़ गए। उसकी सैलरी उम्मीद से बहुत कम थी। लड़के की यह वायरल पोस्ट अब उन सभी युवाओं के लिए एक सबक बन गई है, जो नौकरी के बड़े-बड़े पैकेज देखकर खुश हो जाते हैं। इस पोस्ट ने एक बार फिर कॉस्ट टू कंपनी (CTC) और इन-हैंड सैलरी के बीच के अंतर पर बहस छेड़ दी है।

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IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद इस ग्रेजुएट को 25 लाख रुपये सालाना के शानदार पैकेज पर नौकरी मिली थी। लेकिन पहली सैलरी क्रेडिट होने पर वह हैरान रह गया। अपनी हालत बताते हुए उसने लिखा, "मुझे लगा बैंक ने गलती की है।" यह लाइन उन हजारों नए ग्रेजुएट्स का दर्द बयां करती है, जो पहली बार सैलरी में होने वाली कटौतियों का सामना करते हैं।

यहां देखें वायरल वीडियो

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उसकी पोस्ट के मुताबिक, CTC और असल सैलरी में यह अंतर कई तरह की कटौतियों की वजह से था, जिन्हें अक्सर कैंपस प्लेसमेंट के दौरान नजरअंदाज कर दिया जाता है। इनमें इनकम टैक्स, प्रोविडेंट फंड (PF), ग्रेच्युटी, इंश्योरेंस और परफॉर्मेंस से जुड़े इंसेंटिव शामिल थे। ये सभी चीजें पैकेज का हिस्सा तो होती हैं, लेकिन हर महीने कैश के रूप में हाथ में नहीं आतीं।

यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और हजारों यूजर्स ने अपने ऐसे ही अनुभव शेयर किए। कई प्रोफेशनल्स ने याद किया कि कैसे अच्छी नौकरी मिलने के बावजूद पहली सैलरी आने पर उन्हें भी ऐसा ही झटका लगा था। इस चर्चा ने यह भी उजागर किया कि कैसे बड़े सैलरी पैकेज कभी-कभी नौकरी शुरू करने वाले छात्रों के मन में गलत उम्मीदें पैदा कर देते हैं।

कई यूजर्स ने इस ग्रेजुएट की तारीफ की कि उसने एक ऐसे विषय पर खुलकर बात की, जिसके बारे में भर्ती के दौरान शायद ही कभी समझाया जाता है। वहीं, दूसरों ने नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले सैलरी स्ट्रक्चर को समझने के महत्व पर जोर दिया।

इस वायरल बातचीत ने युवा प्रोफेशनल्स के बीच फाइनेंशियल लिटरेसी यानी वित्तीय साक्षरता को लेकर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नौकरी ढूंढने वालों को सैलरी ब्रेकअप को ध्यान से देखना चाहिए, जिसमें फिक्स्ड पे, वैरिएबल कंपोनेंट, बोनस, स्टॉक ऑप्शन और कानूनी कटौतियां शामिल हैं, ताकि वे अपनी कमाई का सही अनुमान लगा सकें।

IIT ग्रेजुएट का यह अनुभव एक याद दिलाता है कि भले ही एक बड़ा CTC कागज पर आकर्षक लगे, लेकिन कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचने वाली अंतिम राशि काफी कम हो सकती है। उसके इस अनुभव ने उन अनगिनत युवा प्रोफेशनल्स को एक बड़ी सीख दी है, जो अपनी पहली नौकरी और कॉर्पोरेट सैलरी की हकीकत को समझ रहे हैं।