AI Resume: AI और ChatGPT की वजह से अब रिज्यूमे पहले से ज्यादा प्रोफेशनल दिख रहे हैं। जानिए कंपनियों के सामने क्या नई चुनौती है और रिसर्च में क्या सामने आया।

Resume Screening: नौकरी की तलाश करने वालों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़ा हथियार बन चुका है। अब कुछ ही मिनटों में ऐसा रिज्यूमे तैयार हो जाता है, जो नौकरी के विज्ञापन (Job Description) से लगभग पूरी तरह मेल खाता है। इससे उम्मीदवारों के लिए आवेदन करना आसान हुआ है, लेकिन कंपनियों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है कि आखिर किस रिज्यूमे पर भरोसा किया जाए? इसी टॉपिक पर इन दिनों एक रेडिट पोस्ट वायरल हो रहा, जानिए उसमें AI की मदद से बने रिज्यूमे और हायरिंग के नए चैलेंजेज को लेकर क्या कहा गया है?

क्या कहते हैं भर्ती से जुड़े कई मैनेजर और रिक्रूटर्स

पोस्ट में बताया गया है कि भर्ती से जुड़े कई मैनेजर और रिक्रूटर्स पहले जहां रिज्यूमे देखकर शुरुआती अंदाजा लगा लेते थे, वहीं अब अधिकांश प्रोफाइल एक जैसी प्रोफेशनल और आकर्षक दिखती हैं। ऐसे में सही उम्मीदवार चुनना पहले से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है।

सबसे बड़ी दिक्कत: दावा सही है या सिर्फ अच्छी लिखावट?

भर्ती प्रक्रिया की सबसे बड़ी चुनौती अब रिज्यूमे की भाषा नहीं, बल्कि उसमें किए गए दावों की सच्चाई है। उदाहरण के लिए, अगर कोई उम्मीदवार लिखता है कि उसने किसी बड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट या Kubernetes माइग्रेशन पर काम किया है, तो शुरुआती स्क्रीनिंग करने वाला व्यक्ति हमेशा यह नहीं समझ पाता कि उम्मीदवार ने वास्तव में वह काम किया है या सिर्फ उसके बारे में जानकारी रखता है। यही वजह है कि तकनीकी जानकारी रखने वाले वरिष्ठ मैनेजरों को अंतिम चरण में इंटरव्यू लेना पड़ता है। इससे पूरी हायरिंग प्रक्रिया लंबी और महंगी हो जाती है। वहीं, टेक-होम असाइनमेंट भी हर बार समाधान साबित नहीं होते, क्योंकि कुछ उम्मीदवार उन्हें पूरा नहीं करते या किसी और से करवाने की आशंका रहती है।

AI इंटरव्यू ने चौंकाए नतीजे

इस बीच एक दिलचस्प रिसर्च भी सामने आई। शिकागो बूथ और इरास्मस रॉटरडैम के शोधकर्ताओं ने एक वास्तविक भर्ती कंपनी के साथ 70,000 से ज्यादा आवेदकों पर अध्ययन किया। इसमें AI केवल शुरुआती वॉयस इंटरव्यू लेता था, जबकि अंतिम भर्ती का फैसला इंसानों ने ही किया।

अध्ययन के अनुसार, AI इंटरव्यू से गुजरने वाले उम्मीदवारों को नौकरी का ऑफर मिलने की संभावना 12% अधिक रही। ऐसे उम्मीदवारों के जॉइन करने की संभावना 18% ज्यादा थी और एक महीने बाद भी नौकरी में बने रहने की संभावना 17% अधिक दर्ज की गई। शोधकर्ताओं के मुताबिक इसकी वजह AI की एक जैसी और लगातार इंटरव्यू प्रक्रिया थी, न कि बेहतर निर्णय लेने की क्षमता।

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HR की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

ऑनलाइन चर्चाओं में कई प्रोफेशनल्स ने यह भी कहा कि कई बार HR टीम नौकरी की वास्तविक जरूरतों को सही तरीके से नहीं समझ पाती। कुछ लोगों का दावा है कि वर्षों का अनुभव होने के बावजूद वे सिर्फ इसलिए शुरुआती स्क्रीनिंग में बाहर हो जाते हैं, क्योंकि उनके पास वही डिग्री नहीं होती जो जॉब पोस्ट में लिखी गई है। कई अनुभवी कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने काम करते हुए स्किल सीखी, लेकिन नई डिग्री आधारित शर्तें उनके लिए बाधा बन गईं। हालांकि, एक रिक्रूटर ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके अनुभव में केवल लगभग 5% रिज्यूमे ही पूरी तरह AI से लिखे हुए लगते हैं। यानी सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली शिकायतें हर कंपनी की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शातीं। नीचे देखें पोस्ट-

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उम्मीदवार और कंपनियां क्या सीख सकती हैं?

विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ AI से तैयार किया गया आकर्षक रिज्यूमे अब सफलता की गारंटी नहीं है। उम्मीदवारों को अपने हर दावे के पीछे ठोस अनुभव और उदाहरण रखने चाहिए, क्योंकि इंटरव्यू में गहराई से पूछे गए सवाल ही असली तैयारी की परीक्षा लेते हैं। दूसरी ओर, कंपनियों के लिए भी जरूरी है कि वे केवल कीवर्ड मिलान के बजाय स्किल आधारित स्क्रीनिंग और संरचित इंटरव्यू प्रक्रिया अपनाएं। इससे सही प्रतिभा तक पहुंचना आसान होगा और भर्ती में होने वाली गलतियों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।