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Durga Kumawat: 10 साल में शादी, स्ट्रीट लाइट में पढ़ाई… मजदूरी से जिम तक का सफर, 300KG उठाकर बनी चैंपियन
Durga Kumawat Powerlifting Success Story: गरीबी, 10 साल की उम्र में शादी और मजदूरी जैसे संघर्षों से लड़कर दुर्गा कुमावत ने पावरलिफ्टिंग में 300KG का रिकॉर्ड बनाया। उनकी संघर्ष से सफलता तक का सफर हर लड़की के लिए प्रेरणा है, जानें।

दुर्गा कुमावत: गरीबी में शुरू हुआ सफर, सपनों पर कभी नहीं लगा ब्रेक
राजस्थान की दुर्गा कुमावत की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। घर में छह बेटियां, पिता सिक्योरिटी गार्ड और मां छोटे-मोटे काम करके जैसे-तैसे घर चलाती थीं। हालत इतने खराब थे कि घर में बिजली तक नहीं थी। लेकिन पढ़ने की चाह इतनी मजबूत थी कि दुर्गा और उनकी बहन रात में सड़क की लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई करती थीं। मुश्किलें थीं, लेकिन हार मानना उन्होंने कभी सीखा ही नहीं।
दुर्गा कुमावत: 10 साल की उम्र में शादी, छिन गया बचपन
दुर्गा कुमावत की जिंदगी तब पूरी तरह बदल गई, जब सिर्फ 10 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। राजस्थान की एक पुरानी प्रथा “आटा-साटा” के तहत परिवारों के दबाव में ये फैसला लिया गया। शादी के बाद उनका स्कूल छूट गया और ससुराल में उन्हें घूंघट में रहकर खाना बनाना और खेतों में काम करना पड़ता था। एक छोटी बच्ची के लिए ये सब किसी सजा से कम नहीं था। दुर्गा कुमावत ने अपन इंस्टाग्राम पर अपने संघर्ष की स्टोरी भी शेयर की है। देखें-
दुर्गा कुमावत के पिता की बीमारी और फिर परिवार की जिम्मेदारी
कुछ समय बाद दुर्गा कुमावत के पिता को कैंसर हो गया, जिसके बाद दुर्गा को अपने मायके लौटना पड़ा। अब जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर थी। परिवार चलाने के लिए उन्होंने मजदूरी की, फैक्ट्री में काम किया और फिर एक ऑटोमोबाइल कंपनी में चपरासी की नौकरी भी की। लगातार मेहनत और शारीरिक काम ने उनकी सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया।
दुर्गा कुमावत: जिम से शुरू हुआ पावरलिफ्टिंग का नया सफर
सेहत सुधारने के लिए दुर्गा कुमावत ने जिम जॉइन किया। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। उन्होंने धीरे-धीरे पावरलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की। स्क्वैट्स, बेंच प्रेस और डेडलिफ्ट जैसे एक्सरसाइज में खुद को मजबूत बनाना शुरू किया। उनके कोच ने उनकी ताकत को पहचाना और उन्हें प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
पहली ही प्रतियोगिता में गोल्ड, फिर दुर्गा कुमावत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा
दुर्गा कुमावत ने जब पहली बार पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, तो गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंका दिया। इसके बाद उन्होंने 15 दिन में जिला स्तर पार किया, 3 महीने के अंदर राज्य स्तर पर भी गोल्ड जीता। आगे चलकर उन्होंने नेशनल लेवल पर सिल्वर मेडल हासिल किया और 300 किलो का शानदार रिकॉर्ड भी बनाया।
आज कई लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं दुर्गा कुमावत
दुर्गा कुमावत की कहानी ये बताती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ता खुद बन जाता है। एक बच्ची जो कभी स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ती थी, आज देश का नाम रोशन कर रही है। उनकी कहानी उन सभी लड़कियों के लिए उम्मीद है, जो अपने सपनों को हालात के आगे छोड़ देती हैं।
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