IAS ट्रेनिंग कैसे होती है, जानिए LBSNAA में क्या-क्या होता है?
LBSNAA Training Life: यूपीएससी 2025 इंटरव्यू के बाद कैंडिडेट को अब फाइनल रिजल्ट का इंतजार है। इस बीच जानिए IAS, IPS, IFS चयन के बाद LBSNAA में कैसी होती है ट्रेनिंग लाइफ, सख्त रूटीन और असली चुनौतियां।

UPSC 2025 रिजल्ट का इंतजार, LBSNAA से होगी असली शुरुआत
यूपीएससी 2025 इंटरव्यू प्रोसेस पूरा हो चुका है और अब कैंडिडेट्स की नजर फाइनल रिजल्ट पर टिकी है। मेरिट लिस्ट आते ही IAS, IPS, IFS जैसी टॉप सर्विस में चुने गए कैंडिडेट्स की शुरुआती ट्रेनिंग LBSNAA मसूरी में शुरू होती है। यहीं से सिविल सर्विस की असली जर्नी शुरू होती है, जो जितनी सम्मानजनक है उतनी ही कठिन भी।
LBSNAA की ट्रेनिंग लग्जरी नहीं, रियलिटी चेक
अक्सर लोग सोचते हैं कि LBSNAA की लाइफ आरामदायक होती है, लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। यहां दिन की शुरुआत सुबह 5:30 बजे होती है, चाहे सर्दी हो या गर्मी। 5 मिनट की देरी पर सख्त सजा मिलती है, कभी घुड़सवारी ग्राउंड में दौड़, तो कभी रिपोर्ट कार्ड में एंट्री। डिसिप्लिन यहां कोई विकल्प नहीं, बल्कि नियम है।
दिन-भर यूनिफॉर्म और भागदौड़ का चक्र
IAS ट्रेनिंग के दौरान कैंडिडेट्स को दिन में कई बार यूनिफॉर्म बदलनी पड़ती है। पहले एक्सरसाइज, फिर यूनिफॉर्म बदलकर मेस जाना, वहां से लौटकर फिर यूनिफॉर्म चेंज और क्लास के लिए निकलना। अगर सही यूनिफॉर्म नहीं पहनी, तो बाहर कर दिया जाता है। यह रूटीन रोज दोहराया जाता है, बिना किसी छूट के।
पहाड़ियों के बीच फिजिकल और मेंटल टेस्ट
LBSNAA का कैंपस पहाड़ियों पर बसा है। हॉस्टल से मेस और क्लास तक पहुंचने के लिए खड़ी चढ़ाई-ढलान और करीब 150 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं। कई बार कैंडिडेट रास्ते में ही हांफने लगते हैं, लेकिन रुकना ऑप्शन नहीं है। ये सब जानबूझकर कराया जाता है, ताकि फिजिकल स्ट्रेंथ के साथ मेंटल एंड्योरेंस भी तैयार हो सके।
क्यों जरूरी है इतनी सख्त ट्रेनिंग?
सिविल सर्विस एक हाई-प्रेशर और डायनेमिक करियर है, जहां जनता की उम्मीदें बेहद ज्यादा होती हैं। LBSNAA की ट्रेनिंग उसी दबाव के लिए तैयार करती है। ट्रेनिंग के बाद शुरुआती दो साल की पोस्टिंग भी कठिन इलाकों में होती है। सीनियर्स सपोर्ट जरूर करते हैं, लेकिन फ्रंटलाइन पर नए अफसरों को रखा जाता है, ताकि वे असली चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।

