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Satyapal Malik Education: कितने पढ़े-लिखे थे सत्यपाल मलिक? वकील से बने नेता और फिर इन राज्यों के राज्यपाल
Who Was Satya Pal Malik: जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक का 79 साल की उम्र में निधन हो गया। वे बीमार चल रहे थे। जानिए सत्यपाल मलिक कौन थे, उनका करियर, एजुकेशन समेत इंटरेस्टिंग लाइफ फैक्ट्स।

कौन थे सत्यपाल मलिक?
सत्यपाल मलिक एक अनुभवी भारतीय राजनेता थे, जिन्हें सबसे ज्यादा जम्मू और कश्मीर के अंतिम राज्यपाल के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने अगस्त 2018 से अक्टूबर 2019 तक इस पद पर कार्य किया। सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बुध सिंह और माता का नाम जगनी देवी था। पिता का निधन बचपन में ही हो गया था। पालन-पोषण मां ने किया था।
सत्यपाल मलिक का एजुकेशन क्वालिफिकेशन
बचपन से ही उनमें एक अलग तरह की सोच और कुछ नया जानने की जिज्ञासा थी। उन्होंने मेरठ यूनिवर्सिटी से साइंस और लॉ की पढ़ाई की थी। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें इतिहास, संगीत और फोटोग्राफी में भी काफी रुचि थी। सत्यपाल मलिक सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक अच्छे लेखक भी थे। उन्होंने राजनीति और अपने अनुभवों पर कई लेख और किताबें लिखीं, जो उनकी सोच और जीवन को बेहतर ढंग से समझने का जरिया हैं।
सत्यपाल मलिक की राजनीतिक शुरुआत
सत्यपाल मलिक की राजनीतिक यात्रा 1965-66 में शुरू हुई थी। वो डॉ. राम मनोहर लोहिया की समाजवादी विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में आए। छात्र जीवन में वो मेरठ कॉलेज के स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने और बाद में मेरठ यूनिवर्सिटी (अब चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी) के छात्र संघ के अध्यक्ष भी रहे। सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत चौधरी चरण सिंह की पार्टी भारतीय क्रांति दल के टिकट पर चुनाव जीतकर की थी।
सत्यपाल मलिक का पॉलिटिकल करियर
छात्र राजनीति से शुरुआत की और फिर राज्यसभा और लोकसभा के सांसद बने। इसके बाद उन्हें बिहार, ओडिशा, गोवा, मेघालय और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों का राज्यपाल भी बनाया गया। हालांकि उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन उनके आखिरी कुछ साल विवादों से भी घिरे रहे।
सत्यपाल मलिक के कार्यकाल के दौरान हटाया गया आर्टिकल 370
सत्यपाल मलिक के जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल कार्यकाल के दौरान ही 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 हटाया गया, जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया और केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। यह भारतीय राजनीति का ऐतिहासिक फैसला माना जाता है और आज उस घटना की छठी वर्षगांठ भी है।
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