केरल के 29 वर्षीय हाइजिल जेबिन ने पायलट बनने के लिए कड़ा संघर्ष किया। इंजीनियरिंग में फेल होने और जोमैटो में काम करने के बावजूद वे डटे रहे। पिता के निधन के बाद लोन लेकर अब वे फिलीपींस में पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
बचपन का सपना सच करना सबके लिए आसान नहीं होता। कुछ लोगों को मंजिल आसानी से मिल जाती है, तो कुछ को कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। केरल के 29 साल के हाइजिल जेबिन की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है। इंजीनियरिंग में फेल होने, जोमैटो में डिलीवरी का काम करने, पिता को खोने और एजुकेशन लोन के लिए धक्के खाने के बावजूद, इस लड़के ने पायलट बनने की अपनी जिद नहीं छोड़ी।
बचपन के सपने में आई पहली रुकावट
हाइजिल 15 साल के थे, तभी से उनका मन एविएशन सेक्टर में था। लेकिन परिवार के कहने पर उन्होंने केरल के मुन्नार स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया। धीरे-धीरे इस कोर्स से उनका मन उठ गया। नतीजा ये हुआ कि 20 सब्जेक्ट्स में उनकी बैकलॉग आ गई और डिग्री पूरी करने में छह महीने का एक्स्ट्रा समय लग गया। लेकिन इस नाकामी ने उनके असली सपने को नहीं तोड़ा।
जोमैटो डिलीवरी से लेकर मैथ्स पढ़ाने तक का सफर
हाइजिल इंडियन आर्म्ड फोर्सेज में पायलट बनना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी। पढ़ाई और भर्ती प्रक्रिया के दौरान अपना खर्च निकालने के लिए उन्होंने कोच्चि में जोमैटो डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करना शुरू किया। करीब छह महीने बाद वो बेंगलुरु शिफ्ट हो गए। वहां उन्होंने एक एडटेक कंपनी में मैथ्स ट्यूटर की नौकरी कर ली। नौकरी के साथ-साथ वो पायलट बनने के अपने लक्ष्य पर भी फोकस करते रहे।
पिता का निधन, नौकरी छूटी और एक और झटका
साल 2020 में दुबई में उनके पिता को हार्ट अटैक आ गया। कोविड महामारी के उस दौर में इलाज और सफर का इंतजाम करना परिवार के लिए बहुत मुश्किल था। पिता को भारत लाने की तमाम कोशिशों के बाद भी, जून 2021 में उनका निधन हो गया। इस सदमे के बाद हाइजिल की पढ़ाने वाली नौकरी भी चली गई। दूसरी तरफ, उम्र सीमा पार हो जाने की वजह से आर्म्ड फोर्सेज में पायलट बनने का उनका मौका भी हाथ से निकल गया।
लोन रिजेक्ट होने के बावजूद विदेश में ट्रेनिंग
इसके बाद उन्होंने कमर्शियल पायलट बनने का फैसला किया। उन्होंने फिलीपींस की 'फास्ट एविएशन एकेडमी' को चुना, लेकिन ट्रेनिंग के लिए पैसों का इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती थी। करीब दो साल तक वो एजुकेशन लोन के लिए बैंकों के चक्कर काटते रहे और कई बार उन्हें निराशा हाथ लगी। आखिरकार एक बैंक ने उनका लोन पास कर दिया। दिसंबर 2024 में वो फिलीपींस गए और ट्रेनिंग शुरू की। 2026 में उन्होंने प्राइवेट पायलट लाइसेंस (PPL) की ट्रेनिंग पूरी कर ली है। अब वो कमर्शियल पायलट बनने के लिए अगले लेवल की ट्रेनिंग ले रहे हैं।
मंजिल की तरफ बढ़ते कदम
हाइजिल की ये कहानी सिर्फ करियर बदलने की कहानी नहीं है। ये कहानी है निजी नुकसान, पैसों की तंगी और बार-बार मिलने वाली निराशा के बावजूद अपने लक्ष्य पर डटे रहने की। वो अभी भी कमर्शियल पायलट की ट्रेनिंग ले रहे हैं, और उनका ये सफर अपने आप में एक बड़ी कामयाबी है।






