Viral Post 1 Lakh Salary is New 30000: क्या 1 लाख रुपए मंथली सैलरी अब कम पड़ने लगी है? गुरुग्राम की महिला की वायरल पोस्ट में जानिए मिडिल क्लास का पूरा मासिक बजट और खर्च का हिसाब।

Instagram Viral Post: एक समय था जब महीने की 1 लाख रुपए की सैलरी को आर्थिक रूप से मजबूत स्थिति का प्रतीक माना जाता था। लेकिन अब बढ़ती महंगाई, मेट्रो शहरों का महंगा रहन-सहन और भविष्य को सुरक्षित बनाने की जरूरत ने इस सोच को बदलना शुरू कर दिया है। हाल ही में गुरुग्राम की रहने वाली सीए मुस्कान मित्तल की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इसी मुद्दे को सामने रखा, जिसमें उन्होंने बताया कि 1 रुपए लाख की मंथली इनकम भी रोजमर्रा के खर्च, बचत और निवेश के बीच कैसे पूरी तरह बंट जाती है।

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ऐसे बंटता है 1 लाख रुपए का मंथली बजट

पोस्ट के मुताबिक, अगर कोई मध्यमवर्गीय नौकरीपेशा व्यक्ति मेट्रो शहर में अकेले रहता है, तो उसकी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्चों में चला जाता है। उदाहरण के तौर पर करीब 25 हजार रुपए किराए में, 10 हजार रुपए खाने-पीने और राशन पर, 5 हजार रुपए आने-जाने के खर्च पर और लगभग 3 हजार रुपए बिजली, इंटरनेट और मोबाइल जैसे बिलों पर खर्च हो सकते हैं। इसके अलावा कपड़ों और पर्सनल केयर पर 5 हजार रुपए, बाहर खाने और मनोरंजन के लिए 5 हजार रुपए, मेडिकल, बीमा और इमरजेंसी जरूरतों के लिए 7 हजार रुपए और परिवार की मदद, उपहार और अन्य छोटे-मोटे खर्चों के लिए करीब 5 हजार रुपए अलग रखने की बात कही गई है।

सिर्फ खर्च नहीं, बचत और निवेश भी बड़ी प्राथमिकता

पोस्ट का सबसे अहम हिस्सा यह था कि इसमें भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया गया। इसमें हर महीने 20 हजार रुपए SIP और अन्य निवेश में लगाने और 15 हजार रुपए इमरजेंसी फंड या अतिरिक्त बचत के लिए रखने का सुझाव दिया गया। यानी कमाई का बड़ा हिस्सा भविष्य की तैयारी में भी जाता है। पोस्ट का संदेश साफ था कि उद्देश्य हर रुपये को बचाना नहीं, बल्कि वर्तमान की जरूरतों और आने वाले समय की आर्थिक सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाना है। नीचे देखें वायरल पोस्ट-

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सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई सहमति

यह पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे अपनी जिंदगी से जुड़ा हुआ बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि आज के समय में 1 लाख रुपए की सैलरी पहले जैसी बड़ी नहीं रह गई है। कुछ लोगों ने सवाल किया कि जब 1 लाख रुपए का बजट इस तरह बंट जाता है तो कम आय वाले परिवार कैसे संतुलन बना पाते होंगे। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि बढ़ती महंगाई, ऊंचा किराया और लगातार बढ़ते घरेलू खर्चों ने मिडिल क्लास की वित्तीय चुनौतियों को पहले से ज्यादा कठिन बना दिया है।

बदलती आर्थिक हकीकत की ओर इशारा

हालांकि हर व्यक्ति का खर्च उसकी लाइफस्टाइल, शहर और पारिवारिक जिम्मेदारियों के अनुसार अलग हो सकता है, लेकिन यह चर्चा इस बात की ओर जरूर इशारा करती है कि आज सिर्फ अच्छी सैलरी होना ही पर्याप्त नहीं है। सही बजट प्लानिंग, SIP निवेश, इमरजेंसी फंड और फाइनेंशियल मैनेजमेंट पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो चुके हैं। यही वजह है कि बढ़ती महंगाई के दौर में लोग कमाई बढ़ाने के साथ-साथ अपने पैसे को बेहतर तरीके से मैनेज करने पर भी अधिक ध्यान दे रहे हैं।