How to Get an International Job from India: क्या भारत में बैठकर 1.8 करोड़ रुपए की विदेशी नौकरी पाई जा सकती है? क्या बिना विदेश में नेटवर्क और बिना रिलोकेशन के इंटरनेशनल जॉब मिल सकती है? जानिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्तिक मोदी ने किस रणनीति और तैयारी से हासिल किया बड़ा ग्लोबल ऑफर।

Indian Engineer Gets ₹1.8 crore Job Offer: विदेश में नौकरी करने का सपना देखने वाले लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। टेक प्रोफेशनल कार्तिक मोदी ने सोशल मीडिया पर खुलासा किया है कि उन्होंने भारत में रहते हुए ही करीब 1.8 करोड़ रुपए सालाना का अंतरराष्ट्रीय जॉब ऑफर हासिल किया। खास बात यह रही कि इसके लिए न उनके पास विदेश में कोई मजबूत नेटवर्क था और न ही पहले से किसी दूसरे देश में रहने का अनुभव। कार्तिक ने अपनी सफलता का श्रेय किसी शॉर्टकट या हैक को नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित तैयारी और लगातार मेहनत को दिया है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले उन्होंने LinkedIn Jobs, Indeed और Levels.fyi जैसे प्लेटफॉर्म की मदद से 25 से 30 ऐसी विदेशी कंपनियों की सूची बनाई जो वीजा स्पॉन्सरशिप देती थीं। इसके बाद उन्होंने करीब 35 से 40 जॉब डिस्क्रिप्शन का विश्लेषण किया। जिन स्किल्स की मांग बार-बार दिखाई दी, उन्हें अपनी तैयारी का आधार बनाया। इसी के आधार पर उन्होंने 10 से 12 सप्ताह का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया।

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कार्तिक के अनुसार शुरुआती पांच सप्ताह डेटा स्ट्रक्चर और एल्गोरिद्म (DSA) की तैयारी में लगाए गए। अगले तीन सप्ताह सिस्टम डिजाइन पर फोकस किया गया, जबकि बाद के हफ्तों में डोमेन नॉलेज, बिहेवियरल इंटरव्यू और मॉक इंटरव्यू की तैयारी की गई। उन्होंने बताया कि DSA में सैकड़ों सवाल हल करने की बजाय लगभग 100 महत्वपूर्ण समस्याओं पर ध्यान दिया और हर समाधान को समझाकर बोलने का अभ्यास किया।

सिस्टम डिजाइन की तैयारी को उन्होंने सबसे बड़ा गेम चेंजर बताया। इसके तहत ऑथेंटिकेशन, पेमेंट, सर्च, नोटिफिकेशन और फीड जैसे 8 से 10 प्रमुख सिस्टम्स की गहराई से तैयारी की गई। साथ ही अपने वास्तविक प्रोजेक्ट्स को भी व्यवस्थित तरीके से डॉक्यूमेंट किया, ताकि इंटरव्यू में स्केल, परफॉर्मेंस और तकनीकी फैसलों पर ठोस चर्चा की जा सके।

कार्तिक ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय इंटरव्यू में केवल सही जवाब देना ही काफी नहीं होता। उम्मीदवार की सोच, समस्या सुलझाने का तरीका और ईमानदारी भी देखी जाती है। इसलिए उन्होंने स्पष्ट और संरचित जवाब देने की आदत विकसित की और जहां जवाब नहीं पता होता था, वहां अनुमान लगाने की बजाय साफ तौर पर स्वीकार किया।

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उन्होंने एक पेज का ग्लोबल-स्टैंडर्ड रिज्यूमे तैयार किया, कई मॉक इंटरव्यू दिए और केवल उन्हीं नौकरियों के लिए आवेदन किया जो उनकी प्रोफाइल से मेल खाती थीं। आखिरकार इसी स्ट्रेटजी ने उन्हें भारत से सीधे 1.8 करोड़ रुपए का इंटरनेशनल जॉब ऑफर दिलाया। कार्तिक का संदेश साफ है, विदेशी नौकरी पाने के लिए पहले विदेश जाना जरूरी नहीं है। सही दिशा में की गई तैयारी, लगातार अभ्यास और सोच-समझकर बनाई गई रणनीति आपको दुनिया की बड़ी कंपनियों तक पहुंचा सकती है।