डेनमार्क में रहने वाली एक जापानी महिला ने बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस पर वीडियो शेयर किया। इसमें दिखाया गया है कि वहां लोग शाम 4 बजे काम खत्म कर जीवन का आनंद लेते हैं, जो कई देशों के लंबे वर्किंग कल्चर के विपरीत है।

क्या आप जीने के लिए काम करते हैं, या काम करने के लिए जीते हैं? ये सवाल अक्सर उन लोगों के मन में आता है जो ऑफिस के लंबे वर्किंग कल्चर से परेशान हैं। हमारे देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया में कई ऐसी कंपनियां हैं जहां लोगों पर काम का भारी बोझ होता है। लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं, जहां वर्क-लाइफ बैलेंस को सबसे ज्यादा तवज्जो दी जाती है। ऐसा ही एक अनुभव डेनमार्क में रहने वाली जापानी महिला यूकी ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है।

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यूकी ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें एक आम कामकाजी दिन यानी बुधवार की शाम का नजारा है। वीडियो में दिखता है कि शाम के साढ़े चार बजे ही शहर की सड़कें लोगों से भरी हुई हैं।

यूकी ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, 'अगर मैं अपने जापानी दोस्तों को बताऊं कि डेनमार्क में लोग शाम 4 बजे काम खत्म कर देते हैं, तो वे यकीन नहीं करेंगे। इसलिए खुद देख लीजिए। ये एक बुधवार की शाम 4:35 बजे का नजारा है। हर कोई बाहर है, बातें कर रहा है, हंस रहा है और जिंदगी का मजा ले रहा है।'

यूकी आगे बताती हैं कि जिन देशों में उन्होंने पहले काम किया, वहां इस वक्त भी वो ऑफिस में बैठकर काम कर रही होती थीं। उनका मानना है कि डेनमार्क के लोगों को सिर्फ ज्यादा समय ही नहीं मिलता, बल्कि उन्हें यह भी पता है कि मिले हुए समय का सबसे बेहतर इस्तेमाल कैसे करना है। यूकी के इस वीडियो पर लोगों ने जमकर कमेंट्स किए हैं।

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एक यूजर ने लिखा, 'असली वर्क-लाइफ बैलेंस तो इसे कहते हैं।' एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, 'हमारे यहां 4 बजे निकलो तो लोग पूछते हैं- क्या हुआ, हाफ-डे लेकर जा रहे हो?' कई लोगों ने यह भी कहा कि ‘एशिया के लोगों के लिए तो यह एक सपने जैसा है।’