कर्नाटक सिविल जज भर्ती 2025 में 83 उम्मीदवार चयनित हुए हैं। कई युवाओं ने 24-25 साल की उम्र में जज बनकर कीर्तिमान स्थापित किया। सिरसी के सुमंत नाइक ने दूसरी रैंक और धारवाड़ के 3 युवा वकीलों ने सफलता पाई।

बेंगलुरु : अगर इरादे पक्के हों तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती। कर्नाटक के युवा लॉ ग्रेजुएट्स ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कर्नाटक सिविल जज भर्ती परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट आ गया है और इसमें राज्य के अलग-अलग हिस्सों के टैलेंटेड युवाओं ने बहुत कम उम्र में जज बनकर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने कुल 83 उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में कर्नाटक के सिरसी के रहने वाले सुमंत मंजुनाथ नाइक ने राज्य में दूसरी रैंक हासिल कर सबका ध्यान खींचा है। वहीं, धारवाड़ के तीन युवा वकील भी अब जज की कुर्सी संभालने के लिए तैयार हैं।

सिरसी के सुमंत नाइक को राज्य में दूसरी रैंक

उत्तर कन्नड़ जिले की सिरसी तहसील के हेगडेकट्टा के रहने वाले सुमंत मंजुनाथ नाइक ने सिविल जज परीक्षा में दूसरी रैंक हासिल कर अपने इलाके का नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि सुमंत ने अपनी पहली ही कोशिश में यह शानदार कामयाबी हासिल की है। उनके पिता मंजुनाथ नाइक बेंगलुरु लोकायुक्त में सरकारी वकील हैं और मां सुजाता नाइक भी वकील हैं। यानी कानून की समझ उन्हें विरासत में मिली है। पढ़ाई के साथ-साथ सुमंत दूसरी एक्टिविटीज में भी हमेशा आगे रहे हैं और उनका लक्ष्य कानून के क्षेत्र में कुछ बड़ा करने का है।

धारवाड़ के तीन वकीलों ने बढ़ाया मान

धारवाड़ बार एसोसिएशन के तीन सदस्य बहुत ही कम उम्र में जज चुने गए हैं, जिससे पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।

अनिरुद्ध राजीव जोशी (25): रिटायर्ड जिला जज राजीव जोशी के बेटे अनिरुद्ध ने राज्य में 17वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने स्टेट लॉ यूनिवर्सिटी से 3 गोल्ड मेडल के साथ ग्रेजुएशन किया था। अब वह अपने पिता के नक्शेकदम पर चलकर ज्यूडिशियरी की सेवा करने के लिए तैयार हैं।

सुधा पट्टणशेट्टी (24): नवलगुंद तहसील के बल्याल गांव की रहने वाली सुधा एक किसान परिवार से आती हैं। उनकी मेहनत आज रंग लाई है। पहली ही कोशिश में 27वीं रैंक हासिल करने वाली सुधा ग्रामीण लड़कियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई हैं। सिर्फ 24 साल की उम्र में जज बनना उनकी कामयाबी को और भी बड़ा बना देता है।

ऋतेजा पाटिल: हानगल की रहने वाली और हुबली में पली-बढ़ीं ऋतेजा एक रिटायर्ड जिला जज की बेटी हैं। उन्होंने राज्य में 53वीं रैंक हासिल की है। 2024 में एलएलएम पूरा करने के बाद अपनी दूसरी कोशिश में उन्होंने यह बड़ा मुकाम हासिल किया है।

युवा जजों से नई उम्मीदें

पहले न्यायिक सेवाओं में 30-35 साल की उम्र में जज बनना आम बात थी। लेकिन अब 24-25 साल के युवा जज की कुर्सी पर बैठ रहे हैं, जिससे सिस्टम में एक नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। किसान परिवार की बेटियों से लेकर गोल्ड मेडलिस्ट युवाओं का जज बनना यह दिखाता है कि कर्नाटक में शिक्षा का स्तर कितना बेहतर हो रहा है।