एक स्टार्टअप फाउंडर ने इंटर्नशिप इंटरव्यू से मना करने वाले कैंडिडेट को मिडिल-फिंगर इमोजी भेजा। कैंडिडेट द्वारा रेडिट पर अनुभव साझा करने के बाद यह वायरल हो गया, जिससे स्टार्टअप्स में हायरिंग के तरीकों और प्रोफेशनलिज्म पर बहस छिड़ गई है।
एक स्टार्टअप फाउंडर का अजीबोगरीब रिएक्शन इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है। उसने इंटर्नशिप इंटरव्यू के लिए मना करने वाले एक कैंडिडेट को ऐसा जवाब दिया कि अब स्टार्टअप्स में हायरिंग के तौर-तरीकों और प्रोफेशनलिज्म पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक कैंडिडेट ने रेडिट पर अपना "सबसे अजीब इंटर्नशिप एक्सपीरियंस" शेयर किया। देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई और वर्कप्लेस कल्चर पर एक नई बहस शुरू हो गई।

यहां देखें वायरल पोस्ट
कैंडिडेट के मुताबिक, उसने लिंक्डइन पर एक इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था। अगले ही दिन फाउंडर ने उससे संपर्क किया, उसकी प्रोफाइल में दिलचस्पी दिखाई और बातचीत को व्हाट्सएप पर जारी रखने को कहा। हालांकि, कैंडिडेट का दावा है कि हायरिंग का प्रोसेस बहुत अनौपचारिक महसूस हुआ। न कोई ऑफिशियल ईमेल आया, न कोई कैलेंडर इनवाइट और न ही इंटरव्यू का कोई तय शेड्यूल था। उसने यह भी कहा कि जब उसने कंपनी के बारे में रिसर्च की तो उसे शक हुआ, क्योंकि ऑनलाइन बहुत कम जानकारी थी और ऐसा लग रहा था कि एक ही ऑफिस से कई बिजनेस चल रहे हैं।
इंटरव्यू में न जाने का कारण बताते हुए कैंडिडेट ने लिखा, "हो सकता है मेरी गट फीलिंग गलत हो, लेकिन कुछ तो गड़बड़ लग रहा था। इसलिए मैंने इंटरव्यू में न जाने का फैसला किया। बात यह है कि मैंने इंटरव्यू के लिए कभी हामी भरी ही नहीं थी। मैंने बस कहा था कि मैं आपको बता दूंगा।"
कैंडिडेट ने बताया कि बाद में उसने व्हाट्सएप पर फाउंडर को सूचित किया कि वह नहीं आ पाएगा और किसी भी असुविधा के लिए माफी मांगी। शुरुआत में, फाउंडर ने थम्स-अप इमोजी (👍) के साथ रिएक्ट किया। लेकिन, जब कैंडिडेट ने एक दिन बाद चैट देखी, तो उसने पाया कि रिएक्शन कथित तौर पर बदलकर मिडिल-फिंगर इमोजी (🖕) कर दिया गया था।
अपनी प्रतिक्रिया शेयर करते हुए रेडिट यूजर ने लिखा, "माफ करना, लेकिन अगर आप एक फाउंडर हैं जो अपनी कंपनी को रिप्रेजेंट कर रहे हैं और एक कैंडिडेट के मना करने पर ऐसा रिएक्शन देते हैं, तो आपने उस कैंडिडेट के हर शक को सही साबित कर दिया है। ईमानदारी से कहूं तो इस इमोजी ने मुझे कंपनी कल्चर के बारे में उतना बता दिया, जितना शायद इंटरव्यू भी कभी नहीं बता पाता।"
इस पोस्ट पर हजारों लोगों ने रिएक्ट किया। एक यूजर ने कमेंट किया, "मुझे ऐसी कंपनियां पसंद हैं, मुझे वर्कप्लेस के कल्चर के बारे में दोबारा सोचने की ज़हमत नहीं उठानी पड़ती। वे सीधे मेरी ब्लैकलिस्ट में चली जाती हैं।"
एक अन्य ने लिखा, "इस देश में किसी में हिम्मत नहीं है और फिर ऑर्गनाइजेशन्स के बारे में शिकायत करते हैं। ऑर्गनाइजेशन का नाम बताने में क्यों डरना..."
एक तीसरे यूजर ने लिखा, "मैं तो बस कल्पना ही कर सकता हूं कि वह अपने स्टार्टअप में काम करने वाले गुलामों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा, अगर वह व्हाट्सएप पर ऐसे इशारे करने जितना मैच्योर है।"
पोस्ट में कंपनी और फाउंडर का नाम नहीं बताया गया है, और इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, इस घटना ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में प्रोफेशनलिज्म, पारदर्शिता और कैंडिडेट के साथ व्यवहार को लेकर बातचीत फिर से शुरू कर दी है। कई लोगों का तर्क है कि हायरिंग के दौरान होने वाली बातचीत अक्सर फॉर्मल इंटरव्यू से कहीं ज़्यादा कंपनी के वर्क कल्चर का खुलासा कर देती है।
