Why Indian Flag Hoisted on 15 August Morning: 15 अगस्त की सुबह ही तिरंगा क्यों फहराया जाता है? क्या कोई नियम है। जानिए इसके पीछे क्या है इतिहास और खास परंपरा?
15th August Flag Hoisting Time: 15 अगस्त की सुबह जब तिरंगा आसमान में लहराता है, तो यह सिर्फ एक राष्ट्रीय पर्व की रस्म नहीं होती। इसके पीछे आजादी की कहानी, लाल किले से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा और राष्ट्रध्वज के सम्मान से जुड़े नियमों का दिलचस्प मेल है। लेकिन क्या सच में 15 अगस्त को तिरंगा सिर्फ सुबह ही फहराया जा सकता है? जवाब शायद आपको चौंका दे। जानिए आखिर 15 अगस्त की सुबह ही क्यों फहराया जाता है तिरंगा?
15 अगस्त की सुबह ही क्यों दिखता है तिरंगे का सबसे खास नजारा?
हर साल 15 अगस्त की सुबह देश की नजरें दिल्ली के लाल किले पर टिक जाती हैं। प्रधानमंत्री ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और इसके बाद देश को संबोधित करते हैं। स्वतंत्रता दिवस और लाल किले पर होने वाला यह समारोह अब भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की पहचान बन चुका है। लेकिन यहां एक जरूरी तथ्य समझना चाहिए की ऐसा कोई नियम नहीं है कि 15 अगस्त को तिरंगा अनिवार्य रूप से सूर्योदय के समय ही फहराया जाए। सुबह का समय मुख्य राष्ट्रीय समारोह की स्थापित परंपरा से जुड़ा है।
15 अगस्त तिरंगा फहराने के समय को लेकर क्या है नियम
भारतीय ध्वज संहिता के मुताबिक आम तौर पर तिरंगा सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता है। 2022 के बदलाव के बाद रात में भी तिरंगा फहराया जा सकता है, बशर्ते उस पर पर्याप्त रोशनी हो। 15 अगस्त को तिरंगा नीचे से ऊपर ले जाकर फहराया जाता है, जो आजादी और औपनिवेशिक शासन पर भारत की जीत का प्रतीक है।
आजादी से कुछ दिन पहले तय हुआ था हमारा तिरंगा
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का मौजूदा स्वरूप आजादी मिलने से कुछ ही दिन पहले तय हुआ था। संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 को देश ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता हासिल की। यानी 15 अगस्त की सुबह लहराता तिरंगा उस दौर की याद भी अपने साथ लेकर आता है, जब एक नए स्वतंत्र राष्ट्र ने अपनी पहचान के साथ दुनिया के सामने कदम रखा था।
स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराने की परंपरा लाल किले से कैसे जुड़ी?
स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोह में प्रधानमंत्री का लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराना आज एक स्थापित परंपरा है। हालांकि इतिहास का एक दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले पर पहली बार राष्ट्रीय ध्वज 16 अगस्त 1947 को फहराया था। इसके बाद लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराने की परंपरा स्वतंत्रता दिवस के साथ मजबूती से जुड़ती चली गई। समारोह में ध्वजारोहण के साथ राष्ट्रगान, राष्ट्रीय सलामी और 21 तोपों की सलामी जैसे औपचारिक कार्यक्रम भी होते हैं।
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स्वतंत्रता दिवस का झंडा फहराने के लिए सुबह का वक्त क्यों है खास?
सुबह का समय इसलिए भी खास बन गया क्योंकि स्वतंत्रता दिवस का मुख्य राष्ट्रीय समारोह इसी समय आयोजित होता है। यह परंपरा हर साल दोहराई जाती रही है और धीरे-धीरे 15 अगस्त की सुबह तिरंगे के साथ जुड़ गई। इसलिए जब 15 अगस्त की सुबह तिरंगा फहरता है, तो वह केवल एक झंडे का ऊपर उठना नहीं है। वह 1947 में मिली आजादी, स्वतंत्र भारत की पहचान और लोकतंत्र की निरंतर यात्रा का प्रतीक बन जाता है। और शायद यही वजह है कि हर साल 15 अगस्त की सुबह तिरंगे को देखते ही देशभर में एक ही भावना जागती है। आजादी सिर्फ इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है।
15 अगस्त तिरंगा फहराते समय क्या करें?
- तिरंगा सम्मान के साथ तेजी से फहराएं और धीरे-धीरे उतारें।
- तिरंगे को सीधा लगाने पर केसरिया रंग ऊपर होना चाहिए।
- झंडे को ऐसी जगह लगाएं, जहां उसकी गरिमा और प्रमुखता बनी रहे।
- तिरंगा साफ-सुथरा, सही हालत में और 3:2 के अनुपात में होना चाहिए।
- तिरंगा कॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन, सिल्क या खादी से बना हो सकता है।
- आम नागरिक, निजी संस्थाएं और स्कूल-कॉलेज साल के किसी भी दिन तिरंगा फहरा सकते हैं।
- रात में भी तिरंगा फहराया जा सकता है, लेकिन वह पर्याप्त रोशनी में साफ दिखाई देना चाहिए।
- समारोह में किसी मूर्ति या स्मारक के अनावरण के दौरान तिरंगे का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसे जमीन से नहीं छूना चाहिए।
- फटा या गंदा तिरंगा सम्मानजनक तरीके से निजी तौर पर नष्ट किया जाना चाहिए।
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15 अगस्त तिरंगा फहराते समय क्या न करें?
- तिरंगे को किसी व्यक्ति या वस्तु के सम्मान में झुकाकर सलामी न दें।
- तिरंगे को उल्टा या गलत तरीके से न फहराएं।
- झंडे को जमीन, फर्श या पानी से छूने न दें।
- तिरंगे का इस्तेमाल व्यावसायिक सामान या सजावट के तौर पर न करें।
- इसे इमारत, वाहन या मंच को ढकने के लिए इस्तेमाल न करें, सिवाय निर्धारित राजकीय या सैन्य अंतिम संस्कार के।
- तिरंगे को किसी दूसरे झंडे के नीचे या इस तरह न लगाएं कि उसकी प्रमुखता कम हो।
- तिरंगे पर कुछ लिखें, छापें या निशान न बनाएं।
- तिरंगे के डिजाइन को कमर से नीचे पहने जाने वाले कपड़ों या एक्सेसरीज में इस्तेमाल न करें।
- तिरंगे को जानबूझकर फाड़ना, जलाना या नुकसान पहुंचाना कानूनी अपराध है।
- झंडे को ऐसे तरीके से न रखें, जिससे वह फट या खराब हो जाए।
Flag Code का नियम क्या कहता है?
Flag Code of India, 2002 में बदलाव के बाद आम नागरिक भी अपने घर, ऑफिस या फैक्ट्री पर तिरंगा फहरा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ध्वज की गरिमा और नियमों का पालन जरूरी है। तिरंगे का अपमान Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत अपराध है। नियम तोड़ने पर तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
