How to Stop Paper Leaks: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) पेपर लीक रोकने के लिए एक नया तरीका आज़मा रही है। यूनिवर्सिटी एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत टैबलेट पर परीक्षा कराने की तैयारी में है। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय के मुताबिक, अगर यह प्रयोग सफल रहा तो इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

Digital Exam System: पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) परीक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। यूनिवर्सिटी पारंपरिक कागज-कलम वाली परीक्षा की जगह टैबलेट आधारित परीक्षा कराने की योजना पर काम कर रही है। इस नई तकनीक को पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए परखा जाएगा। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय के मुताबिक, इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पेपरलेस, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना है।

टैबलेट में ही खुलेगा डिजिटल प्रश्नपत्र

प्रस्तावित व्यवस्था में छात्रों को परीक्षा केंद्र पर टैबलेट उपलब्ध कराया जाएगा। प्रश्नपत्र को पहले से प्रिंट करके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के बजाय उसे डिजिटल रूप में सुरक्षित तरीके से टैबलेट पर उपलब्ध कराया जाएगा। परीक्षा शुरू होने के समय प्रश्नपत्र डिक्रिप्ट होकर छात्रों की स्क्रीन पर दिखाई देगा। इससे प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग और उसके परिवहन की जरूरत काफी हद तक खत्म हो सकती है।

पेपर लीक की आशंका कम करने पर फोकस

AKTU की इस पहल का सबसे बड़ा उद्देश्य प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना को कम करना है। मौजूदा व्यवस्था में प्रश्नपत्र की छपाई, पैकिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने जैसी कई प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। डिजिटल सिस्टम में इन चरणों को कम किया जा सकता है। प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने तक सुरक्षित डिजिटल फॉर्म में रहेगा, जिससे इसकी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

परीक्षा के लॉजिस्टिक्स भी होंगे आसान

टैबलेट आधारित परीक्षा से सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि परीक्षा के संचालन से जुड़ी कई चुनौतियां भी कम हो सकती हैं। प्रश्नपत्रों की छपाई, उन्हें अलग-अलग केंद्रों तक पहुंचाना और सुरक्षित स्थान पर रखना जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत कम होगी। इससे परीक्षा आयोजित करने में लगने वाले संसाधन और प्रशासनिक काम भी कम किए जा सकते हैं। हालांकि, डिजिटल सिस्टम के लिए तकनीकी व्यवस्था और पर्याप्त सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे।

पहले पायलट प्रोजेक्ट से होगी शुरुआत

यूनिवर्सिटी सीधे सभी परीक्षाओं को डिजिटल मोड में बदलने के बजाय पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इस व्यवस्था की क्षमता और कमियों को परखेगी। इसमें टैबलेट की कार्यक्षमता, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन और छात्रों के अनुभव जैसे पहलुओं को देखा जा सकता है। पायलट के परिणामों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सफल हुआ तो सभी परीक्षाओं पर हो सकता है लागू

अगर पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है और तकनीकी व्यवस्था उम्मीद के मुताबिक काम करती है, तो AKTU भविष्य में अपनी परीक्षाओं को बड़े पैमाने पर टैबलेट आधारित सिस्टम में बदलने पर विचार कर सकती है। इससे यूनिवर्सिटी की परीक्षा व्यवस्था ज्यादा डिजिटल और आधुनिक हो सकती है। साथ ही, पेपर लीक जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए यह मॉडल दूसरे शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक संभावित विकल्प बन सकता है।