सार

भारतीय टीम से बाहर चल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी विश्व कप के बाद पहली बार मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "वह भी आम इंसान की तरह ही सोचते हैं लेकिन बस नकारात्मक सोच पर कंट्रोल रखने के मामले में वह किसी अन्य की तुलना में बेहतर हैं।

नई दिल्ली. भारतीय टीम से बाहर चल रहे विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी विश्व कप के बाद पहली बार मीडिया से बात की। उन्होंने कहा, "वह भी आम इंसान की तरह ही सोचते हैं लेकिन बस नकारात्मक सोच पर कंट्रोल रखने के मामले में वह किसी अन्य की तुलना में बेहतर हैं।" दो बार विश्व चैंपियन टीम की अगुवाई करने वाले इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने कहा कि हर जीत और हर हार के दौरान भावनाएं उन पर भी हावी रही हैं। उन्होंने कहा, "वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में मिली हार के बाद मैं भी उतना ही दुखी था, जितना सब थे।" लेकिन मैंने खुद को संभाला।

"भावनाओं को काबू में रखता हूं"
धोनी ने बुधवार को यहां कहा, "मैं भी आम इंसान हूं लेकिन मैं किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से काबू में रखता हूं।" जुलाई में विश्व कप सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद धोनी के भविष्य को लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। उन्होंने फिलहाल कुछ समय के लिये विश्राम लिया है।

"मुझे भी निराशा होती है, गुस्सा भी आता है"
 उन्होंने कहा, "हर किसी की तरह मुझे भी निराशा होती है। कई बार मुझे भी गुस्सा आता है। लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि इनमें से कोई भी भावना रचनात्मक नहीं है। समस्याओं का जाल बुनने के बजाय उनका समाधान ढूंढना उनके लिये कारगर साबित रहा है।"

भावनाओं को कैसे करते हैं काबू ?
"इन भावनाओं की तुलना में अभी क्या करना चाहिए यह अधिक महत्वपूर्ण है। अगली क्या चीज है जिसकी मैं योजना बना सकता हूं? वह अगला व्यक्ति कौन है जिसका मैं उपयोग कर सकता हूं? एक बार जब मैं यह सोचने लगता हूं तो फिर मैं अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से काबू कर लेता हूं।"

"टी 20 के लिए अलग सोच की जरूरत" 
उन्होंने कहा, "अगर वह टेस्ट मैच है तो आपके पास दो पारियां होती है और आपको अपनी अगली रणनीति तैयार करने के लिये थोड़ा अधिक समय मिलता है। टी20 में सब कुछ तुरत फुरत होता है तो इसमें अलग तरह की सोच की जरूरत होती है।" धोनी ने कहा, "वह एक खिलाड़ी हो सकता है जिसने गलती की या वह पूरी टीम हो सकती है। यह भी हो सकता है कि प्रारूप चाहे कोई भी हो हमने अपनी रणनीति पर अच्छी तरह से अमल नहीं किया हो।"